
इस सीरीज़ के बारे में। दाँतों की देखभाल तेरह भागों की सीरीज़ है — हर उम्र के लिए, ब्रश और फ्लॉस से लेकर बच्चों के दाँत, मसूड़ों की बीमारी और दाँत दर्द तक।
यह भाग 12 है: पैसिफायर से दाँत।
क्या आपके बच्चे की पैसिफायर की आदत चिंता की बात है?
बहुत से माता-पिता के लिए पैसिफायर (चुसनी) बड़ा सहारा होती है। यह रोते बच्चे को चुप करा सकती है, उसे सुलाने में मदद करती है और अनजानी जगहों पर उसे तसल्ली देती है।
लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, मन में सवाल आने लगते हैं: क्या पैसिफायर से बच्चे के दाँतों पर असर पड़ सकता है? क्या दाँत टेढ़े निकलेंगे या बाइट (ऊपर-नीचे के दाँतों का आपस में बैठना) बिगड़ जाएगी?
एक नज़र में
शिशु अवस्था में पैसिफायर का इस्तेमाल आमतौर पर सामान्य माना जाता है। लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल से दाँतों, जबड़ों और मुँह के आसपास के हिस्सों के विकास पर असर पड़ सकता है।
असल चिंता शिशु अवस्था में कभी-कभार के इस्तेमाल की नहीं है। चिंता उस बार-बार के दबाव की है जो लंबे समय तक चूसने से बढ़ते दाँतों और जबड़ों पर पड़ता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री (AAPD) की सलाह है कि बच्चों की चूसने की ऐसी आदतें, जिनसे पोषण नहीं मिलता, करीब 36 महीने की उम्र तक छुड़ाने में उनकी मदद की जाए।
सुरक्षित पैसिफायर चुनें, उस पर मीठी परत और असुरक्षित डोरी वगैरह से बचें, सुरक्षित नींद के नियम मानें, और बच्चा जब चलना-बोलना सीखने की उम्र में आए तो धीरे-धीरे पैसिफायर पर निर्भरता घटाएं।
जवाब काफ़ी हद तक इस पर निर्भर करता है कि बच्चा पैसिफायर कितनी बार इस्तेमाल करता है, कितनी ज़ोर से चूसता है, और यह आदत कितने समय तक चलती है।
शिशु अवस्था में पैसिफायर का इस्तेमाल आमतौर पर सामान्य माना जाता है। लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल से दाँतों, जबड़ों और मुँह के आसपास के हिस्सों के विकास पर असर पड़ सकता है।
AAPD की सलाह है कि बच्चों की ऐसी चूसने की आदतें, जिनसे पोषण नहीं मिलता, करीब 36 महीने की उम्र तक छुड़ाने में मदद की जाए, और शैशव के बाद भी जारी रहने के संभावित असर पर ध्यान दिया जाए।
अच्छी बात यह है कि अगर आपका बच्चा पैसिफायर लेता है तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। कब देना है, उसे सुरक्षित कैसे रखना है और कब छुड़ाना शुरू करना है, यह समझ लेने से आप अपने बच्चे की बढ़ती मुस्कान की रक्षा कर सकते हैं।
पैसिफायर क्या है, और बच्चों को इसकी ज़रूरत क्यों पड़ती है?
पैसिफायर को चुसनी भी कहते हैं। यह बच्चे की चूसने की स्वाभाविक इच्छा पूरी करने के लिए बनी होती है, लेकिन इससे दूध या कोई और पोषण नहीं मिलता।
चूसना शिशु की एक अहम स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। दूध पीने के अलावा भी चूसने से बच्चे शांत और सुरक्षित महसूस कर सकते हैं, खासकर जब वे थके हों, बहुत उत्तेजित हों या सोने की तैयारी में हों।
छोटी-मोटी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के दौरान भी पैसिफायर बच्चे को आराम दे सकती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) झपकी और रात की नींद के समय पैसिफायर देने की सलाह देती है, क्योंकि यह अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) का खतरा घटाने वाले उपायों में गिना जाता है।
जो बच्चे माँ का दूध पीते हैं, उनके लिए आमतौर पर सलाह है कि पैसिफायर तब शुरू करें जब स्तनपान अच्छी तरह जम जाए।
यानी दूध पिलाना ठीक चल रहा हो, बच्चा सही तरीके से लैच करता हो, उसे पर्याप्त दूध मिल रहा हो और वज़न ठीक बढ़ रहा हो। जिन बच्चों को सीधे स्तनपान नहीं कराया जाता, उन्हें चाहें तो पैसिफायर जल्दी भी दी जा सकती है।
पैसिफायर कभी भी दूध पिलाने की जगह नहीं लेनी चाहिए, और भूखे बच्चे को दूध देने में देरी करने के लिए भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
पैसिफायर दाँतों पर कैसे असर डालती है?
असल चिंता शिशु अवस्था में कभी-कभार के इस्तेमाल की नहीं है। चिंता उस बार-बार के दबाव की है जो लंबे समय तक चूसने से बढ़ते दाँतों और जबड़ों पर पड़ता है।
बच्चे का मुँह तेज़ी से बढ़ रहा होता है। बार-बार चूसने से ऊपर-नीचे के दाँत आपस में कैसे मिलते हैं और दाँतों की कतार (आर्च) कैसे बनती है, इस पर असर पड़ सकता है।
1. आगे का ओपन बाइट (पैसिफायर ओपन बाइट)
ओपन बाइट में पीछे के दाँत मिलाने पर भी आगे के ऊपर और नीचे के दाँत आपस में नहीं मिलते।
लंबे समय तक पैसिफायर लेने पर वह आगे के दाँतों के बीच बनी रहती है, जिससे उनके सामान्य रूप से निकलने और सीध में आने में रुकावट आ सकती है। इससे ऊपर और नीचे के आगे के दाँतों के बीच दिखने वाली खाली जगह बन सकती है।
2. पीछे का क्रॉसबाइट
क्रॉसबाइट में ऊपर के कुछ पिछले दाँत, नीचे के दाँतों के बाहर बैठने के बजाय उनके अंदर की तरफ़ बैठते हैं।
चूसने की आदत लगातार बनी रहे तो दाँतों की कतार के आकार और चौड़ाई पर असर पड़ सकता है, और कुछ बच्चों में इस तरह की बाइट की समस्या हो सकती है।
3. बढ़ा हुआ ओवरजेट (आगे निकले दाँत)
ओवरजेट का मतलब है ऊपर और नीचे के आगे के दाँतों के बीच आड़ी दूरी। लंबे समय तक पैसिफायर लेने से ऊपर के आगे के दाँत नीचे के दाँतों के मुकाबले ज़्यादा आगे निकल सकते हैं।
ये बदलाव कितने होंगे और कितने गंभीर होंगे, यह हर बच्चे में अलग होता है। पैसिफायर लेने वाले हर बच्चे को दाँतों की समस्या नहीं होती। आदत कितनी तेज़ है, कितनी बार है और कितने समय चली, ये तीनों बातें मायने रखती हैं।
4. क्या पैसिफायर से दाँतों में कैविटी होती है?
साफ़ पैसिफायर सीधे दाँत सड़ने का कारण नहीं बनती। लेकिन उसे शहद, चीनी, शरबत या दूसरी मीठी चीज़ों में डुबोने से दाँत शक्कर के संपर्क में आते हैं, जिससे कैविटी हो सकती है।
दाँत निकलने के बाद फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से नियमित ब्रश करना और बार-बार मीठी चीज़ें खाने से बचना ज़रूरी है, चाहे आपका बच्चा पैसिफायर ले या न ले।
बच्चे को किस उम्र में पैसिफायर छोड़ देनी चाहिए?
ऐसा कोई एक दिन तय नहीं है जब हर बच्चे को पैसिफायर छोड़नी ही पड़े, लेकिन उम्र एक अहम बात ज़रूर है।
- जन्म से 6 महीने: पैसिफायर आराम दे सकती है और सुरक्षित इस्तेमाल की सलाह मानते हुए सोने के समय दी जा सकती है।
- 6–12 महीने: सोचना शुरू करें कि दिन में बेवजह इस्तेमाल कब और कैसे घटाया जाए, यह मानते हुए कि पैसिफायर के कुछ फ़ायदे अब भी हो सकते हैं।
- 12–18 महीने: धीरे-धीरे निर्भरता घटाना समझदारी है। 12 महीने के बाद भी इस्तेमाल जारी रहने पर कान के बीच के हिस्से में अचानक होने वाले संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ पाया गया है।
- 18–36 महीने: आदत छुड़ाने की ओर बढ़ें, क्योंकि इस दौरान ज़्यादा चूसने से बढ़ती बाइट पर असर पड़ सकता है।
- 3 साल तक: AAPD की सलाह के मुताबिक कोशिश करें कि तब तक आदत छूट जाए।

ये व्यावहारिक पड़ाव हैं, कोई सख्त नियम नहीं। अगर आपका बच्चा तीन साल का होने को है और अब भी पैसिफायर पर बहुत निर्भर है, तो बाल दंत चिकित्सक बाइट की जाँच करके आपको छुड़ाने की एक व्यावहारिक योजना बनाने में मदद कर सकते हैं।
आदत छूटने के बाद दाँतों के कुछ बदलाव ठीक हो सकते हैं, खासकर जब बच्चा छोटा हो। लेकिन सुधार की गारंटी नहीं होती, इसलिए बाइट की कोई पक्की समस्या अपने-आप ठीक होने के भरोसे छोड़ने के बजाय दिखानी चाहिए।
क्या ऑर्थोडॉन्टिक पैसिफायर दाँतों के लिए बेहतर होती है?
ऑर्थोडॉन्टिक पैसिफायर के बारे में कहा जाता है कि उसके निप्पल का आकार जीभ और तालू को सामान्य पैसिफायर से अलग तरह से जगह देता है।
फिर भी, “ऑर्थोडॉन्टिक” शब्द का यह मतलब नहीं कि वह दाँतों की हर समस्या रोक देती है। इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि कोई खास डिज़ाइन बाइट में बदलाव का खतरा खत्म कर देता है।
अगर आप पैसिफायर देना चाहते हैं, तो ऐसी चुनें जो बच्चे की उम्र के हिसाब से हो, साबुत हो और लागू सुरक्षा मानकों के अनुसार बनी हो। लंबे समय तक इस्तेमाल रोकने की जगह उसके आकार या कंपनी के दावों पर भरोसा न करें।
पैसिफायर और बच्चों में मुँह से साँस लेना: क्या कोई संबंध है?
माता-पिता कभी-कभी देखते हैं कि बच्चा खुले मुँह से सोता है, शोर के साथ साँस लेता है, या मुँह से साँस लेना पसंद करता दिखता है।
मुँह से साँस लेना कोई दाँतों की बीमारी नहीं है, और इसके लिए अपने-आप पैसिफायर को दोष नहीं देना चाहिए।
शिशुओं में लगातार मुँह से साँस लेना नाक बंद होने, एडेनॉइड (नाक के पीछे की गाँठें) बढ़ने या नाक में रुकावट के दूसरे कारणों से जुड़ा हो सकता है। कुछ बच्चों में मुँह की आदतें या जीभ और होंठ की बदली हुई स्थिति भी साथ में दिख सकती है, जो साँस की दिक्कत के साथ मौजूद हो सकती हैं।
लंबे समय तक पैसिफायर लेने से दाँतों की कतार और बाइट पर असर पड़ सकता है, लेकिन मुँह से साँस लेने के हर मामले का सीधा कारण वही है, यह साबित नहीं हुआ है।
माता-पिता को मदद कब लेनी चाहिए?
अगर आपका बच्चा आराम की हालत में भी अक्सर मुँह से साँस लेता है, नाक लगातार बंद रहती है, वह अक्सर खर्राटे लेता है, या सोते समय साँस लेने में मुश्किल होती दिखती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से जाँच करवाएं। ज़रूरत पड़ने पर बाल दंत चिकित्सक भी दाँतों, बाइट और मुँह की आदतों को देख सकते हैं।
अगर बच्चे को साँस लेने में कठिनाई हो, होंठ नीले या स्लेटी पड़ जाएं, छाती साफ़ अंदर धंसती दिखे, या साँस की तकलीफ़ के दूसरे संकेत हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
मुँह से साँस लेने का कारण पता करना ज़रूरी है। सिर्फ़ पैसिफायर हटाकर यह मान लेना ठीक नहीं कि समस्या अपने-आप चली जाएगी।
पैसिफायर सुरक्षित तरीके से कैसे इस्तेमाल करें
कुछ सीधी-सादी सावधानियाँ टाले जा सकने वाले खतरे घटा सकती हैं।
पैसिफायर ध्यान से चुनें और संभालें। बच्चे की उम्र के हिसाब से, एक ही टुकड़े में बनी या सुरक्षा मानकों वाली, ठीक-ठाक सुरक्षा शील्ड और हवा के छेद वाली पैसिफायर लें। उसे नियमित रूप से देखते रहें और दरार पड़ने, फटने, चिपचिपी होने या खराब होने पर बदल दें।
उसे साफ़ रखें। खासकर छोटे शिशुओं के लिए निर्माता की सफ़ाई की हिदायतें मानें। पैसिफायर को कभी अपने मुँह में डालकर साफ़ न करें, इससे कीटाणु बच्चे तक पहुँच सकते हैं।
उस पर कभी मीठी चीज़ें न लगाएं। 12 महीने से छोटे बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु बोटुलिज़्म का खतरा रहता है। चीनी, शरबत और दूसरी मीठी परतों से भी बचें।
उसे कभी असुरक्षित तरीके से न बांधें। पैसिफायर को बच्चे की गर्दन, कलाई या हाथ में न बांधें, और सोते समय उसे कपड़ों या बिस्तर से न जोड़ें। डोरी, रिबन, भरे हुए खिलौने और ऐसी दूसरी चीज़ों से बचें जिनसे गला घुटने या साँस रुकने का खतरा बन सकता है।
सुरक्षित नींद के नियम मानें। बच्चे को हमेशा पीठ के बल, सख्त और सपाट सतह पर सुलाएं, जहाँ ढीला बिस्तर या नरम चीज़ें न हों। पैसिफायर एक वैकल्पिक उपाय है, सुरक्षित नींद की दूसरी बातों का विकल्प नहीं। अगर बच्चे के सो जाने के बाद वह गिर जाए, तो उसे दोबारा लगाने की ज़रूरत नहीं।

बच्चे की पैसिफायर कैसे छुड़ाएं
कई बच्चों के लिए पैसिफायर भावनात्मक सहारा होती है। उसे अचानक हटाने से बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है या उसे सोने में दिक्कत हो सकती है, इसलिए शांति और एकरूपता से काम लेना मदद करता है।
- पहले दिन में इस्तेमाल घटाएं। पैसिफायर को सोने या खास मुश्किल पलों के लिए रखें, हर बार अपने-आप न दें।
- शांत करने के दूसरे तरीके अपनाएं। गोद में लेना, हल्के से झुलाना, गाना गाना, किताब पढ़ना या सोने का जाना-पहचाना क्रम आज़माएं।
- हौसला बढ़ाएं। बच्चा बिना पैसिफायर के शांत हो जाए तो उसकी तारीफ़ करें। शर्मिंदा करने या सज़ा देने से बचें।
- एक जैसा तरीका रखें। घर के दूसरे लोगों के साथ योजना तय कर लें, ताकि नियम बच्चे के लिए एक जैसे रहें।
- ज़रूरत हो तो पेशेवर मदद लें। अगर आदत नहीं छूट रही या बढ़ती बाइट को लेकर चिंता है, तो बाल दंत चिकित्सक मदद कर सकते हैं।
आदत छुड़ाने के लिए पैसिफायर को काटें, उसमें छेद करें या जानबूझकर खराब न करें, क्योंकि खराब हुई पैसिफायर असुरक्षित हो सकती है।
बाल दंत चिकित्सक को कब दिखाना चाहिए?
AAPD की सलाह है कि बच्चे के पहले जन्मदिन तक एक नियमित डेंटल होम बना लें। शुरुआती मुलाकातों में दाँतों में बदलाव पक्के होने से पहले ही पैसिफायर की आदत पर बात करने का मौका मिलता है।
अगर आपको इनमें से कुछ दिखे तो दाँतों की जाँच करवाएं:
- पीछे के दाँत मिलाने पर आगे के ऊपर और नीचे के दाँतों के बीच खाली जगह दिखना।
- ऊपर के आगे के दाँत धीरे-धीरे ज़्यादा आगे निकले दिखना।
- ऊपर और नीचे के पिछले दाँतों का सामान्य तरीके से न मिलना।
- तीन साल की उम्र के बाद भी पैसिफायर की आदत बने रहना।
- बच्चे की बाइट, जबड़े के विकास या मुँह की आदतों को लेकर कोई चिंता।
लगातार मुँह से साँस लेने, आदतन खर्राटों या नाक में रुकावट की आशंका पर बाल रोग विशेषज्ञ को जाँच करनी चाहिए। जब लक्षण आपस में मिलते हों तो दाँतों और सामान्य चिकित्सा, दोनों तरह की जाँच काम आ सकती हैं।
दाँतों की देखभाल वाली सीरीज़
हर उम्र में दाँत और मसूड़े स्वस्थ रखने पर तेरह लेख।
- हर उम्र के लिए दाँतों की देखभाल की पूरी गाइड। पूरा रूटीन, उम्र के हिसाब से।
- ब्रश करने का तरीका — बास, मॉडिफाइड बास और फोन्स। कौन सा तरीका किस मुँह पर, और दो मिनट असल में कितने लंबे होते हैं।
- इलेक्ट्रिक या मैनुअल टूथब्रश। सबूत क्या कहते हैं, और यहाँ कीमत का फर्क उसके लायक है या नहीं।
- दाँतों के बीच सफाई। फ्लॉस, इंटरडेंटल ब्रश, और टूथपिक विकल्प क्यों नहीं है।
- टॉन्सिल स्टोन के लिए वॉटर फ्लॉसर। कितना दबाव सुरक्षित है, और वह सस्ता तरीका जो ज़्यादातर लोगों को पहले आज़माना चाहिए।
- इंटरडेंटल ब्रश और खून आते मसूड़े। सही नाप चुनना, और खून आमतौर पर दो हफ्ते में क्यों बंद हो जाता है।
- बोतल से दाँत सड़ना। छोटे बच्चों में कीड़ा, सफ़ेद दाग़, बचाव और इलाज।
- दूध के दाँत कब गिरते हैं। उम्र, क्रम और माता-पिता के काम की बातें।
- पायरिया (मसूड़ों की बीमारी)। कारण, लक्षण, उपचार और बचाव।
- मसूड़े की सूजन, खून आना और मुंह सूखना। शरीर की बीमारियां मसूड़ों और मुंह पर कैसे असर डालती हैं।
- दाँत दर्द की दवा। क्या लें, दर्द क्यों होता है, और इलाज।
- पैसिफायर से दाँत। पैसिफायर बढ़ते दाँतों और बाइट पर कैसे असर डालती है, और इसे कब छुड़ाएं। (आप यही पढ़ रहे हैं)
- 6 साल की दाढ़ें। पहली स्थायी दाढ़ें, ये कब निकलती हैं और इन्हें कैसे सुरक्षित रखें।
खास बातें
पैसिफायर बच्चों को शांत करने का उपयोगी साधन हो सकती है, और शिशु अवस्था में इसका इस्तेमाल अपने-आप दाँतों के विकास के लिए नुकसानदेह नहीं है। चिंता तब होती है जब बच्चे के बड़े होने पर भी बार-बार चूसना जारी रहता है।
सुरक्षित पैसिफायर चुनें, मीठी परत और असुरक्षित डोरी वगैरह से बचें, सुरक्षित नींद के नियम मानें, और बच्चा जब चलना-बोलना सीखने की उम्र में आए तो धीरे-धीरे निर्भरता घटाएं। करीब तीन साल की उम्र तक आदत छुड़ाने का लक्ष्य रखें, और दाँतों में बदलाव या लगातार मुँह से साँस लेना दिखे तो पेशेवर सलाह लें।
आज पैसिफायर बच्चे को आराम दे सकती है, लेकिन सही समय पर आदत छुड़ाने में मदद करना कल उसकी बढ़ती मुस्कान की रक्षा कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पैसिफायर से दाँत आगे निकल आते हैं?
लंबे समय तक पैसिफायर लेने से ऊपर के आगे के दाँत नीचे के दाँतों के मुकाबले ज़्यादा आगे निकल सकते हैं। ये बदलाव कितने होंगे और कितने गंभीर होंगे, यह हर बच्चे में अलग होता है, और आदत की तेज़ी, बारंबारता और अवधि, तीनों मायने रखती हैं।
पैसिफायर ओपन बाइट क्या है?
ओपन बाइट में पीछे के दाँत मिलाने पर भी आगे के ऊपर और नीचे के दाँत आपस में नहीं मिलते। लंबे समय तक पैसिफायर लेने पर आगे के दाँतों के बीच बनी पैसिफायर उनके सामान्य रूप से निकलने और सीध में आने में रुकावट डाल सकती है।
क्या पैसिफायर से कान में संक्रमण हो सकता है?
पैसिफायर का इस्तेमाल, खासकर शैशव के बाद भी जारी रहने पर, कान के बीच के हिस्से में अचानक होने वाले संक्रमण (एक्यूट ओटाइटिस मीडिया) के ज़्यादा खतरे से जुड़ा पाया गया है। इसका मतलब यह नहीं कि पैसिफायर लेने वाले हर बच्चे को कान का संक्रमण होगा।
क्या पैसिफायर से बच्चा मुँह से साँस लेने लगता है?
इसके मज़बूत सबूत नहीं हैं कि अकेली पैसिफायर लगातार मुँह से साँस लेने की वजह है। जब मुँह से साँस लेना अक्सर हो, तो नाक में रुकावट, बढ़े हुए एडेनॉइड और दूसरी स्थितियों पर भी विचार करना चाहिए।
क्या लंबे समय तक पैसिफायर लेने से बोलने पर असर पड़ता है?
बोलने के विकास पर पैसिफायर के सीधे असर के बारे में मिले-जुले सबूत हैं। अगर आपके बच्चे को बोलने में लगातार दिक्कत है, तो यह मान लेने के बजाय कि कारण सिर्फ़ पैसिफायर है, बाल रोग विशेषज्ञ या स्पीच-लैंग्वेज विशेषज्ञ से सलाह लें।
अगर मेरा तीन साल का बच्चा पैसिफायर छोड़ने से मना करे तो क्या करें?
धीरे-धीरे इस्तेमाल घटाएं, हौसला बढ़ाएं और शांत करने के दूसरे तरीके अपनाएं। बाइट की जाँच और सही योजना पर बात करने के लिए बाल दंत चिकित्सक के पास जाएं।
क्या बच्चे की पैसिफायर ज़बरदस्ती छुड़ा देनी चाहिए?
नहीं। शिशुओं के लिए पैसिफायर आराम और नींद से जुड़े फ़ायदे दे सकती है। चलना-बोलना सीखने की उम्र में सज़ा या परेशानी का सहारा लेने के बजाय, उम्र के हिसाब से एक जैसा और धीरे-धीरे छुड़ाने वाला तरीका अपनाएं।
अगर बच्चे के आगे के दाँतों में खाली जगह हो तो क्या दंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए?
हाँ। यह खाली जगह ओपन बाइट हो सकती है, हालांकि कारण जाँच के बाद ही पता चल सकता है। जल्दी जाँच से तय हो पाता है कि सिर्फ़ निगरानी काफ़ी है या इलाज की ज़रूरत है।
शब्दावली
चूसना जिससे पोषण नहीं मिलता (नॉन-न्यूट्रिटिव सकिंग): ऐसा चूसना जो बच्चे की चूसने की स्वाभाविक इच्छा तो पूरी करता है, पर दूध या कोई और पोषण नहीं देता।
आगे का ओपन बाइट: पीछे के दाँत मिलाने पर भी आगे के ऊपर और नीचे के दाँतों का आपस में न मिलना।
पीछे का क्रॉसबाइट: ऊपर के कुछ पिछले दाँतों का नीचे के दाँतों के बाहर बैठने के बजाय उनके अंदर की तरफ़ बैठना।
ओवरजेट: ऊपर और नीचे के आगे के दाँतों के बीच की आड़ी दूरी।
एक्यूट ओटाइटिस मीडिया: कान के बीच के हिस्से का संक्रमण।
डेंटल होम: बाल दंत चिकित्सा की ऐसी नियमित जगह जहाँ बच्चे को बचपन की शुरुआत से दिखाया जाता है।
संदर्भ
- American Academy of Pediatric Dentistry. Policy on Pacifiers. The Reference Manual of Pediatric Dentistry 2026–2027. Revised 2024. Available at: AAPD – Policy on Pacifiers.
- American Academy of Pediatrics. Baby Pacifiers & Thumb Sucking: What Parents Need to Know. HealthyChildren.org. Updated January 20, 2026. Available at: AAP – Pacifiers and Thumb Sucking.
- Moon RY, Carlin RF, Hand I; Task Force on Sudden Infant Death Syndrome and the Committee on Fetus and Newborn. Sleep-Related Infant Deaths: Updated 2022 Recommendations for Reducing Infant Deaths in the Sleep Environment. Pediatrics. 2022;150(1):e2022057990. Available at: Read the AAP clinical recommendations.
- Meek JY, Noble L; Section on Breastfeeding. Policy Statement: Breastfeeding and the Use of Human Milk. Pediatrics. 2022;150(1):e2022057988. Available at: AAP – Breastfeeding and the Use of Human Milk.
- American Academy of Pediatric Dentistry. Policy on Early Childhood Caries (ECC): Consequences and Preventive Strategies. The Reference Manual of Pediatric Dentistry 2026–2027. Revised 2025. AAPD – Oral Health Policies and Recommendations. Available at: AAPD – Policy on Early Childhood Caries.
- National Health Service. Looking After Your Baby’s Teeth. Last reviewed April 1, 2025. Available at: NHS – Baby Dental Care.
- American Academy of Pediatric Dentistry. Policy on the Dental Home. The Reference Manual of Pediatric Dentistry 2026–2027. Revised 2023. Available at: AAPD – Policy on the Dental Home.
सभी संदर्भ लिंक 19 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए।
अस्वीकरण
यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है और डॉक्टर या दंत चिकित्सक की पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है। अपने बच्चे के बारे में किसी दंत चिकित्सक या बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें।