
यह लेख HiGoodHealth की ओरल हेल्थ सीरीज़ का हिस्सा है। हमारी हर उम्र के लिए पूरी मुँह देखभाल गाइड पूरे परिवार के लिए है; यह लेख उन सालों के बारे में है जब बच्चे के दूध के दाँत गिरते हैं।
एक नज़र में
- ज़्यादातर बच्चों के दूध के दाँत छह साल के आसपास गिरना शुरू होते हैं और ग्यारह से तेरह साल तक पूरे हो जाते हैं। सबसे पहले नीचे के आगे वाले दाँत जाते हैं। कुल बीस दाँत होते हैं, और ये छह-सात साल में थोड़े-थोड़े करके गिरते हैं, सब एक साथ नहीं।
- दूध का दाँत धक्का देकर बाहर नहीं आता। नीचे से उसकी जड़ अपने आप घुलती जाती है, क्योंकि पक्का दाँत नीचे बन रहा होता है। जब पकड़ने लायक जड़ बचती ही नहीं, तब दाँत गिर जाता है — इसीलिए तैयार दाँत बिना तकलीफ़ के निकल जाता है।
- उम्र में फ़र्क़ उससे कहीं ज़्यादा होता है जितना माता-पिता सोचते हैं। चार्ट एक रेंज है, कोई डेडलाइन नहीं। देखने लायक बात यह है कि दाँत मोटे तौर पर सही क्रम में जा रहे हैं या नहीं, और दोनों तरफ़ एक जैसी रफ़्तार है या नहीं।
- एक बात माता-पिता को ज़रूरत से ज़्यादा डरा देती है: दूध के दाँत के पीछे से पक्का दाँत निकल आना, जिससे कुछ दिन के लिए दाँतों की दो कतारें दिख जाती हैं। नीचे के आगे वाले दाँतों में इस उम्र में यह आम है और अपने आप ठीक हो जाता है।
- असली ध्यान देने वाली बात अलग है — कीड़े या चोट की वजह से दाँत समय से पहले गिर जाना। भारत में बच्चों के दाँतों में बिना इलाज के कीड़ा लगना आम है, और यही वह हालत है जिसमें डेंटिस्ट को जल्दी दिखाना चाहिए।
दूध के दाँत (dudh ke dant) होते क्या हैं?
दूध के दाँत बच्चे के पहले दाँत होते हैं। डॉक्टर इन्हें प्राइमरी या मिल्क टीथ कहते हैं। इनकी कुल गिनती बीस होती है — ऊपर दस और नीचे दस। पहला दाँत आमतौर पर छह महीने के आसपास निकलता है।
ये सिर्फ़ जगह भरने के लिए नहीं होते। इन्हीं से बच्चा चबाता है और बोलना सीखता है, इन्हीं से जबड़ा सही आकार लेता है, और यही पक्के दाँत के लिए जगह रोककर रखते हैं।
दूध के दाँत गिरते क्यों हैं?
नीचे पक्का दाँत बनता है और ऊपर की तरफ़ बढ़ता है। जैसे-जैसे वह ऊपर आता है, ऊपर वाले दूध के दाँत की जड़ धीरे-धीरे घुलती जाती है। दाँत ढीला होता है, निकल जाता है, और उसकी जगह पक्का दाँत आ जाता है।
इसी प्रक्रिया को डेंटिस्ट एक्सफ़ोलिएशन कहते हैं। इसी से दो बातें समझ आती हैं: तैयार दाँत आसानी से क्यों निकल जाता है, और जो तैयार नहीं है उसे ज़बरदस्ती खींचने पर दर्द क्यों होता है।
दूध के दाँत गिरना कब शुरू होता है?
ज़्यादातर बच्चों में छह से सात साल के बीच। किसी एक दाँत की कोई तय उम्र नहीं होती। बच्चों के दाँतों की गाइडलाइन भी अंदाज़न रेंज ही देती है, क्योंकि कई पूरी तरह स्वस्थ बच्चे इस शेड्यूल पर नहीं चलते।
उम्र का चार्ट
| दूध का दाँत | ऊपर का जबड़ा | नीचे का जबड़ा |
|---|---|---|
| बीच वाले सामने के दाँत | 7–8 साल | 6–7 साल |
| उनके बगल वाले दाँत | 8–9 साल | 7–8 साल |
| नुकीले दाँत (कैनाइन) | 11–12 साल | 9–11 साल |
| पहली दाढ़ | 9–11 साल | 10–12 साल |
| दूसरी दाढ़ | 9–12 साल | 11–13 साल |
ये अंदाज़न रेंज हैं, कोई पक्की तारीख़ नहीं।
सबसे पहले कौन सा दाँत गिरता है?
आमतौर पर नीचे के बीच वाले सामने के दाँत, छह से सात साल के आसपास। उसके बाद मोटे तौर पर: ऊपर के बीच वाले दाँत सात से आठ साल में, उनके बगल वाले सात से नौ साल में, और फिर दाढ़ें और नुकीले दाँत नौ से तेरह साल के बीच।
क्रम आगे-पीछे होता रहता है, ख़ासकर ऊपर और नीचे के जबड़े में। अगर आपके बच्चे का कोई एक जोड़ा क्रम से हटकर गिरे, तो आमतौर पर इसमें कुछ ग़लत नहीं होता।
साल दर साल क्या होता है
करीब 6–7 साल
नीचे के आगे वाले दूध के दाँत ढीले होकर गिरते हैं। इसी दौरान पहली पक्की दाढ़ें भी आती हैं, और यहीं माता-पिता चूक जाते हैं। ये दाढ़ें सबसे पीछे, दूध की दाढ़ों के पीछे निकलती हैं और किसी दाँत की जगह नहीं लेतीं, इसलिए कुछ गिरता ही नहीं।
कुछ गिरता नहीं, तो तकलीफ़ का दोष किसी और चीज़ पर चला जाता है। सबसे पीछे मसूड़े में दर्द, बच्चे का फिर से चीज़ें चबाना, एक तरफ़ जबड़े में दर्द और छह साल की उम्र में नींद टूटना — ये अक्सर बस एक दाढ़ निकलने के लक्षण होते हैं।
लेकिन बुख़ार नहीं। दाँत निकलने से बुख़ार नहीं आता, और बुख़ार को दाँतों के सिर मढ़ देने से असली इन्फ़ेक्शन का इलाज टल जाता है। जिस देश में डेंगू, टाइफ़ाइड और मलेरिया आम हैं, वहाँ बुख़ार की जाँच बुख़ार की तरह होनी चाहिए — दाँत चाहे जो कर रहे हों।
करीब 7–9 साल
ऊपर और नीचे के आगे वाले दाँत एक-एक करके बदलते जाते हैं। ढीले दाँत, बीच-बीच में गैप, चेहरे के हिसाब से बड़े दिखने वाले पक्के दाँत, और हर महीने बदलती हुई मुस्कान — यह सब सामान्य है।
करीब 9–12 साल
दूध की दाढ़ें और नुकीले दाँत गिरते हैं, और उनकी जगह पक्के दाँत आ जाते हैं।
करीब 11–13 साल
दूध की दूसरी दाढ़ें सबसे आख़िर में जाती हैं। किशोरावस्था की शुरुआत तक ज़्यादातर बच्चों के दाँत पक्के दाँतों में बदल चुके होते हैं।
दाँत ढीला होने पर क्या होता है
पहले वह थोड़ा हिलता है, फिर और ज़्यादा हिलने लगता है। बच्चा जीभ या उँगली से उसे हिलाता रहता है, और आख़िर में वह निकल जाता है। उसके बाद पक्का दाँत दिखना शुरू होता है।
अपने आप ढीले हुए दाँत को ज़बरदस्ती खींचने की ज़रूरत नहीं होती। धागा बाँधकर दरवाज़े से खींचने वाला पुराना तरीक़ा छोड़ ही दीजिए। डेंटिस्ट को दिखाने की बात तब है जब तेज़ दर्द हो, सूजन हो, पस आए, ख़ून बंद न हो, या पक्का दाँत निकल रहा हो और दूध का दाँत अब भी मज़बूती से जमा हो।
दाँत की दो कतारें: क्या ये अपने आप ठीक हो जाती हैं?
कभी-कभी पक्का दाँत उस दूध के दाँत के पीछे से निकलने लगता है जो अभी गिरा ही नहीं है। कुछ दिन के लिए बच्चे के दाँतों की दो कतारें दिखने लगती हैं। अंग्रेज़ी में इसे शार्क टीथ कहते हैं, और यह सबसे ज़्यादा नीचे के आगे वाले दाँतों में होता है।

ज़्यादातर मामलों में हाँ, यह अपने आप ठीक हो जाता है। आगे वाला दूध का दाँत आमतौर पर पहले से ढीला होता है। वह गिरते ही पीछे वाला पक्का दाँत अगले कुछ हफ़्तों में आगे खिसक आता है। इसमें जीभ का हाथ अंदाज़े से कहीं ज़्यादा होता है।
इंतज़ार करना है या डॉक्टर को दिखाना है — यह पीछे वाली कतार से नहीं, आगे वाले दूध के दाँत से तय होता है। अगर वह हिल रहा है, तो इंतज़ार करना ठीक है।
अगर कई हफ़्ते बाद भी वह जमा हुआ है, या नया दाँत साफ़ तौर पर टेढ़ा निकल रहा है, या यह सिर्फ़ एक तरफ़ हो रहा है और दूसरी तरफ़ काफ़ी पीछे है, तो डेंटिस्ट को दिखाइए।
छह से आठ साल की उम्र में नीचे के आगे वाले दाँतों में यह आम बात है। मुँह के बाकी हिस्सों में यह कम होता है, इसलिए पीछे की तरफ़ दो कतारें दिखें तो अपॉइंटमेंट जल्दी ले लीजिए।
दूध का दाँत समय से पहले गिर जाए तो
समय से पहले गिरने की कोई वजह होती है: गहरा कीड़ा, इन्फ़ेक्शन, चोट, या पक्के दाँत का ग़लत जगह से निकलना। इनमें सबसे आम है बिना इलाज के बढ़ा हुआ कीड़ा, और उसे रोका जा सकता है। देखिए बोतल से दाँत सड़ना और छोटे बच्चों में कैविटी।
दिक़्क़त ख़ाली जगह से नहीं है, उस जगह के साथ जो होता है उससे है। बगल वाले दाँत उस ख़ाली जगह में खिसक आते हैं, और पक्के दाँत के लिए जितनी जगह चाहिए उतनी बचती नहीं। इससे दाँत टेढ़े निकल सकते हैं या भीड़ में फँस सकते हैं।
इसी के लिए स्पेस मेंटेनर होता है। यह एक छोटा-सा उपकरण है जो उस जगह को तब तक खुला रखता है जब तक पक्का दाँत तैयार न हो जाए। इसकी ज़रूरत है या नहीं, यह डेंटिस्ट तय करता है — कौन सा दाँत गया, बच्चे की उम्र क्या है, और नीचे पक्का दाँत कितना बन चुका है।
बच्चों के दाँतों के स्पेशलिस्ट ज़्यादातर बड़े शहरों में ही हैं। अगर आसपास कोई न हो, तो सरकारी डेंटल कॉलेज का बच्चों वाला विभाग आमतौर पर सबसे सस्ता और भरोसेमंद रास्ता होता है।
फ्लोराइड, फ्लोरोसिस और भारत का पानी
भारत में कहानी यहीं सबसे अलग हो जाती है। फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट इन्हीं सालों में आने वाले पक्के दाँतों की हिफ़ाज़त करता है, और उसे इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन देश के बड़े हिस्सों के ज़मीनी पानी में फ्लोराइड पहले से ही ज़्यादा है।
कई राज्यों में फ्लोरोसिस दर्ज है, और इसी वजह से भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय फ्लोरोसिस की रोकथाम के लिए एक अलग राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाता है। इससे प्रभावित ज़िलों में सबसे ज़्यादा ख़तरा बच्चों को ही रहता है।
डेंटल फ्लोरोसिस तब होता है जब पक्के दाँत बन ही रहे हों और बच्चा ज़रूरत से ज़्यादा फ्लोराइड निगल ले — यानी ठीक इसी उम्र में। दाँतों पर सफ़ेद चकत्ते, और ज़्यादा हो जाए तो भूरे धब्बे दिखते हैं, जबकि दाँत अंदर से ठीक होता है।
करना बस इतना है। तीन साल से बड़े बच्चे के लिए मटर के दाने जितना टूथपेस्ट, उससे छोटे के लिए बस हल्की-सी लकीर। सामने खड़े रहकर ब्रश करवाइए ताकि वह थूके, निगले नहीं। और बच्चे को स्वाद के चक्कर में टूथपेस्ट खाने मत दीजिए।
अगर घर में बोरवेल का पानी आता है, या आपका ज़िला फ्लोरोसिस वाला है, तो डेंटिस्ट को बता दीजिए। इससे फ्लोराइड की गोलियों और माउथवॉश की सलाह बदल जाती है। इसका मतलब फ्लोराइड टूथपेस्ट बंद करना नहीं है — कीड़े से बचाने में उससे बेहतर कुछ नहीं।

दूध का दाँत गिर ही नहीं रहा तो
दाँत का रुका रहना अपने आप में कोई दिक़्क़त नहीं है। बहुत सारे बच्चे बस थोड़ा देर से चलते हैं।
जाँच तब करवाइए जब पक्का दाँत निकल आया हो और दूध का दाँत अब भी जमा हो, दोनों तरफ़ की रफ़्तार में साफ़ फ़र्क़ हो, दर्द या सूजन हो, या कोई दाँत ग़लत जगह से निकलता दिखे।
क्या इसमें दर्द होता है?
अपने आप गिरने में ज़्यादा तकलीफ़ नहीं होती। मसूड़े में हल्का दर्द और थोड़ा-सा ख़ून — बस इतना ही।
दाँत ढीला होने से पहले ही तेज़ दर्द हो, तो बात अलग है। वह कीड़े, इन्फ़ेक्शन, चोट या दाँत के ग़लत निकलने का इशारा है, सामान्य प्रक्रिया का नहीं। उसे दिखवा लेना चाहिए।
दाँत निकल जाए तो क्या करें
क्या करें: बच्चे को शाबाशी दीजिए, जगह साफ़ रखिए, ब्रश करना रोज़ की तरह जारी रखिए, हल्के ख़ून के लिए साफ़ रुई या गॉज़ से थोड़ा दबाइए, और डेंटिस्ट के पास जाना जारी रखिए।
क्या न करें: जो दाँत तैयार नहीं है उसे खींचिए मत, दर्द या सूजन को नज़रअंदाज़ मत कीजिए, दुखती जगह के आसपास ब्रश करना बंद मत कीजिए, और यह मत मानिए कि दाँत जल्दी गिर जाना कोई बड़ी बात नहीं।

जब दोनों तरह के दाँत साथ हों
जिस दौर में बच्चे के मुँह में दूध के और पक्के, दोनों तरह के दाँत होते हैं उसे मिक्स्ड डेंटिशन कहते हैं। ब्रश की क्वालिटी सबसे ज़्यादा इसी वक़्त मायने रखती है, क्योंकि अभी जो दाँत आ रहे हैं वही ज़िंदगी भर रहेंगे।
दिन में दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से ब्रश करवाइए, और साथ खड़े रहिए। सात-आठ साल तक ज़्यादातर बच्चे हर सतह ठीक से साफ़ नहीं कर पाते। तरीक़ा हमारी ब्रश करने की गाइड में है।
नई निकली पक्की दाढ़ों पर ख़ास ध्यान दीजिए। वे सबसे पीछे होती हैं, उनमें गहरी लकीरें होती हैं, और वही सबसे ज़्यादा छूट जाती हैं। जहाँ दाँत एक-दूसरे को छूने लगें, वहाँ बीच की सफ़ाई भी शुरू कीजिए — देखिए दाँतों के बीच सफ़ाई।
मीठे के मामले में भारत वाली सलाह साफ़ है। त्योहार की मिठाई दिक़्क़त नहीं है। रोज़ शाम चाय के साथ बिस्किट, रात को सोते वक़्त मीठा दूध, और दोपहर भर घूँट-घूँट पिया जाने वाला जूस या कोल्ड ड्रिंक दिक़्क़त हैं — क्योंकि दाँत मात्रा से नहीं, बार-बार मीठा लगने से सड़ते हैं।
डेंटिस्ट को कब दिखाएँ
भारत में आदत यही है कि दर्द हो तभी डेंटिस्ट के पास जाते हैं। इस उम्र के बच्चे के लिए यह बहुत देर है, क्योंकि डेंटिस्ट जो चीज़ें पकड़ना चाहता है उनमें से ज़्यादातर उस वक़्त दर्द नहीं करतीं जब उन्हें ठीक करना आसान होता है।
नियमित जाँच से डेंटिस्ट दाँतों का निकलना, गिरना, कीड़ा, सफ़ाई, भीड़, जगह का बंद होना और बनते हुए काटे को समय रहते देख लेता है। सारे दूध के दाँत गिरने का इंतज़ार मत कीजिए।
अपॉइंटमेंट लेने वाले संकेत: दाँत उम्मीद से बहुत पहले गिरना · तेज़ दर्द · सूजन या पस · पक्का दाँत निकल आना जबकि दूध का दाँत जमा हो · दाँत का बहुत देर तक न गिरना · दोनों तरफ़ साफ़ फ़र्क़ · चोट लगने के बाद दाँत गिरना · दर्द की वजह से खाने में दिक़्क़त।
मुख्य बातें
दूध के दाँत छह साल के आसपास गिरना शुरू होते हैं और किशोरावस्था की शुरुआत तक पूरे हो जाते हैं, सबसे पहले नीचे के आगे वाले। बीसों दाँत एक साथ नहीं जाते — छह-सात साल में थोड़े-थोड़े करके जाते हैं, और उम्र में थोड़ा-बहुत फ़र्क़ आम बात है।
पीछे से निकलने वाला पक्का दाँत आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है, बशर्ते आगे वाला दूध का दाँत गिर जाए। फ़ैसला उसी से होता है: हिल रहा है तो इंतज़ार, कई हफ़्ते बाद भी जमा है तो डेंटिस्ट।
चार्ट एक रेंज है, शेड्यूल नहीं। किसी एक जन्मदिन से ज़्यादा अहम है क्रम और दोनों तरफ़ की बराबरी। अपने आप ढीला हुआ दाँत अपने आप गिरने दीजिए; जो तैयार नहीं है उसे खींचिए मत।
कीड़े या चोट से दाँत गिरना अलग बात है। उस जगह को बगल वाले दाँत भर सकते हैं, इससे पहले कि पक्का दाँत तैयार हो। इसीलिए जल्दी गिरे दाँत की जाँच ज़रूरी है, और कभी-कभी स्पेस मेंटेनर भी।
भारत में एक बात और सँभालनी है: फ्लोराइड टूथपेस्ट सही थोड़ी-सी मात्रा में, थूककर, ख़ासकर वहाँ जहाँ पानी में फ्लोराइड पहले से ज़्यादा है। और नई निकली पक्की दाढ़ों को बच्चे की अब तक की सबसे अच्छी ब्रशिंग चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दूध के दाँत किस उम्र में गिरते हैं?
ज़्यादातर बच्चों में छह से सात साल के बीच शुरू होते हैं, और आख़िरी दाँत करीब ग्यारह से तेरह साल में गिरते हैं। हर बच्चे में उम्र अलग होती है, और चार्ट सिर्फ़ अंदाज़न हैं।
सबसे पहले कौन सा दाँत गिरता है, और क्या मेरा बच्चा देर कर रहा है?
आमतौर पर नीचे का बीच वाला सामने का दाँत, छह से सात साल में। थोड़ा आगे-पीछे होना सामान्य है। देखने की बात उम्र नहीं, बल्कि क्रम और यह है कि दोनों तरफ़ रफ़्तार एक जैसी है या नहीं।
दाँत की दो कतारें अपने आप ठीक हो जाती हैं?
आमतौर पर हाँ। आगे वाला दूध का दाँत गिरते ही पीछे वाला पक्का दाँत अगले कुछ हफ़्तों में आगे आ जाता है। डेंटिस्ट को तब दिखाइए जब कई हफ़्ते बाद भी आगे वाला दाँत जमा हो, या नया दाँत साफ़ तौर पर टेढ़ा निकल रहा हो।
क्या मुझे बच्चे का ढीला दाँत खींच देना चाहिए?
नहीं। अपने आप ढीला हुआ दाँत अपने आप गिरने देना ही सबसे अच्छा है। जो दाँत तैयार नहीं है उसकी जड़ अब भी जुड़ी होती है, इसलिए जल्दी खींचने पर दर्द और ख़ून होता है।
दूध का दाँत समय से पहले गिर जाए तो?
इसकी कोई वजह होती है — कीड़ा, इन्फ़ेक्शन या चोट। और वह ख़ाली जगह पक्के दाँत के तैयार होने से पहले बंद होने लग सकती है। डेंटिस्ट देखकर बताएगा कि जगह को स्पेस मेंटेनर से खुला रखने की ज़रूरत है या नहीं।
छह साल वाली दाढ़ क्या होती है?
पहली पक्की दाढ़, जो करीब छह साल में दूध की दाढ़ों के पीछे निकलती है। इसके आने पर कुछ गिरता नहीं, इसलिए ध्यान ही नहीं जाता, और अक्सर यही पहली पक्की दाढ़ सबसे पहले सड़ती है। उस उम्र में मसूड़े का दर्द और चबाना अक्सर यही होता है; बुख़ार नहीं।
घर में बोरवेल का पानी है। क्या फ्लोराइड टूथपेस्ट अब भी ठीक है?
हाँ, बस सही थोड़ी-सी मात्रा में। फ्लोरोसिस टूथपेस्ट से ब्रश करने से नहीं, पक्के दाँत बनते वक़्त फ्लोराइड निगलने से होता है। मटर के दाने जितना पेस्ट लीजिए, थुकवाइए, और डेंटिस्ट को पानी का स्रोत बता दीजिए ताकि गोलियों और माउथवॉश की सलाह बदली जा सके।
दाँत देर से निकलें तो कब चिंता करें?
डेंटिस्ट को दिखाइए अगर दोनों तरफ़ साफ़ फ़र्क़ हो, कोई दूध का दाँत बहुत देर तक जमा रहे, कोई दाँत ग़लत जगह से निकल रहा हो, या कोई पक्का दाँत आता ही न दिखे।
शब्दावली
- दूध के दाँत (dudh ke dant): बच्चे के पहले बीस दाँत, जिन्हें प्राइमरी या मिल्क टीथ भी कहते हैं।
- एक्सफ़ोलिएशन: जड़ घुल जाने के बाद दूध के दाँत का अपने आप गिर जाना।
- रिसॉर्प्शन: नीचे पक्का दाँत बनने के साथ दूध के दाँत की जड़ का धीरे-धीरे घुलते जाना।
- मिक्स्ड डेंटिशन: वह दौर जब मुँह में दूध के और पक्के, दोनों तरह के दाँत हों — करीब छह से बारह साल।
- शार्क टीथ: दूध के दाँत के पीछे से पक्का दाँत निकल आना, जिससे कुछ दिन दो कतारें दिखती हैं। सबसे ज़्यादा नीचे के आगे वाले दाँतों में।
- स्पेस मेंटेनर: छोटा-सा उपकरण जो दाँत जल्दी गिर जाने पर उसकी जगह खुली रखता है, ताकि पक्के दाँत को जगह मिल सके।
- छह साल वाली दाढ़: पहली पक्की दाढ़, जो करीब छह साल में दूध की दाढ़ों के पीछे निकलती है और किसी दाँत की जगह नहीं लेती।
- डेंटल फ्लोरोसिस: दाँतों पर सफ़ेद चकत्ते या भूरे धब्बे, जो पक्के दाँत बनते वक़्त ज़्यादा फ्लोराइड निगलने से होते हैं।
संदर्भ
सभी लिंक 12 सितंबर 2026 को जाँचे गए।
- American Academy of Pediatric Dentistry — Dental Growth and Development: https://www.aapd.org/globalassets/media/policies_guidelines/r_dentalgrowth.pdf
- American Academy of Pediatric Dentistry — Management of the Developing Dentition and Occlusion in Pediatric Dentistry: https://www.aapd.org/research/oral-health-policies–recommendations/management-of-the-developing-dentition-and-occlusion-in-pediatric-dentistry/
- American Dental Association — Baby Teeth Eruption Charts, MouthHealthy: https://www.mouthhealthy.org/all-topics-a-z/eruption-charts/
- American Academy of Pediatrics — Teething symptoms, HealthyChildren.org: https://www.healthychildren.org/English/tips-tools/symptom-checker/Pages/symptomviewer.aspx?symptom=Teething
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार — फ्लोरोसिस की रोकथाम और नियंत्रण का राष्ट्रीय कार्यक्रम: https://dghs.gov.in/content/1355_3_NationalProgrammePreventionControl.aspx
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार — राष्ट्रीय मौखिक स्वास्थ्य कार्यक्रम: https://dghs.gov.in/content/1352_3_NationalOralHealthProgramme.aspx
अस्वीकरण
यह लेख सिर्फ़ आम जानकारी के लिए है, डॉक्टरी सलाह नहीं। दाँत निकलने और गिरने की उम्र हर बच्चे में अलग होती है, और यहाँ दी गई रेंज अंदाज़न है। अपने बच्चे के बारे में डेंटिस्ट से बात कीजिए, और तेज़ दर्द, सूजन, पस या चोट के बाद दाँत गिरने पर तुरंत दिखाइए।