
भारत में मसूड़ों की बीमारी सबसे आम सेहत की दिक्कतों में से एक है। और ज़्यादातर लोगों को इसका पता तभी चलता है जब कोई दाँत हिलने लगता है।
वजह यह नहीं कि भारतीय ठीक से ब्रश नहीं करते। ज़्यादातर घरों में दिन में दो बार ब्रश करना अब आम है। वजह यह है कि दाँतों के बीच सफाई लगभग कोई नहीं करता, और मसूड़ों की बीमारी वहीं से शुरू होती है।
इंटरडेंटल ब्रश उसी काम का औज़ार है, और यह भारतीय मुँहों पर फ्लॉस से बेहतर बैठता है। मसूड़ों की बीमारी दाँतों के बीच की जगह चौड़ी कर देती है, और चौड़ी जगह ठीक वही है जहाँ छोटा ब्रश काम करता है और फ्लॉस नहीं।
और यही टूथपिक की ईमानदार जगह भी है, जो असल में हममें से ज़्यादातर लोगों की आदत है।
एक नज़र में
इंटरडेंटल ब्रश ब्रिसल वाला वह छोटा ब्रश है जो दो दाँतों के बीच की जगह साफ करता है, जहाँ टूथब्रश नहीं पहुँचता। ब्रश करने के साथ दिन में एक बार, यह वह प्लाक हटाता है जिससे मसूड़ों से खून आता है और बाद में पायरिया होता है।
सबसे ज़रूरी नियम एक ही है — ब्रश दाँतों के बीच बिना ज़ोर लगाए घुसना चाहिए। बहुत बड़ा हो तो मसूड़ा घायल करता है। बहुत छोटा हो तो कुछ नहीं करता। ज़्यादातर लोगों को एक ही मुँह के लिए दो या तीन नाप चाहिए होते हैं।
जहाँ जगह ब्रश लायक चौड़ी है, वहाँ ब्रश फ्लॉस से बेहतर है। जहाँ दाँत सटे हुए हैं, वहाँ फ्लॉस ही सही औज़ार है। बहुत से मुँहों में दोनों चाहिए।
टूथपिक इसका विकल्प नहीं है, और न ही दातुन। दोनों जिन सतहों को छूते हैं उन्हें साफ करते हैं, और दाँतों के बीच के मसूड़े को या तो नुकसान पहुँचाते हैं या छोड़ देते हैं।

इंटरडेंटल ब्रश क्या है
इंटरडेंटल ब्रश एक पतले तार या लचीले कोर के चारों तरफ लगे ब्रिसल का छोटा गुच्छा है, जिसमें हैंडल लगा होता है। यह दो दाँतों के बीच की जगह में घुसकर दोनों की बगल साफ करने के लिए बना है।
टूथब्रश दाँत की बाहरी, भीतरी और चबाने वाली सतह साफ करता है। जो दो सतहें दाँतों के बीच एक-दूसरे के सामने होती हैं, उन्हें वह कभी नहीं छूता। और वे हर दाँत का करीब एक तिहाई हिस्सा हैं।
वहाँ बिना छेड़े बैठा प्लाक मसूड़ों से खून, मुँह की बदबू, और सालों में वह हड्डी का नुकसान करता है जिसे यहाँ लोग पायरिया कहते हैं।
इंडियन डेंटल एसोसिएशन दिन में दो बार ब्रश करने के साथ रोज़ दाँतों के बीच सफाई की सलाह देता है। और यूरोपियन फेडरेशन ऑफ पीरियोडोंटोलॉजी, जिसकी गाइडलाइन इस विषय पर सबसे विस्तार से है, कहती है कि जहाँ भी ब्रश बिना मसूड़ा दुखाए घुस जाए, वहाँ पहला विकल्प इंटरडेंटल ब्रश ही है।
भारत में यह ज़्यादा क्यों मायने रखता है
तीन बातें दाँतों के बीच सफाई को यहाँ विदेशी लेखों से बड़ी चीज़ बना देती हैं।
मसूड़ों की बीमारी आम है और चुप है। बढ़ जाने तक इसमें दर्द नहीं होता। लोग डेंटिस्ट के पास दुखते दाँत के लिए जाते हैं, थोड़े खून वाले मसूड़ों के लिए नहीं। इसलिए यह आमतौर पर देर से पकड़ी जाती है।
इलाज का खर्च जेब से जाता है। स्केलिंग सस्ती है। गहरी सफाई, मसूड़ों की सर्जरी और आखिर में इम्प्लांट सस्ते नहीं। यहाँ बचाव कोई सद्गुण नहीं है, यह हिसाब है।
तंबाकू पूरी तस्वीर बदल देती है। गुटखा, खैनी, ज़र्दा, पान मसाला और सिगरेट — सब मसूड़ों की बीमारी बिगाड़ते हैं और उसकी सबसे बड़ी चेतावनी छिपा भी देते हैं, क्योंकि तंबाकू से खून आना घट जाता है। तंबाकू चलाने वालों में मसूड़ों की गंभीर बीमारी हो सकती है और मसूड़े शांत दिखते रह सकते हैं।
कोई भी ब्रश तंबाकू की भरपाई नहीं करता। अगर आप उसे लेते हैं, तो सबसे पहले वही बदलना है, और इस पूरे पन्ने की हर बात उसके बाद आती है।
जिस आदत की जगह यह लेता है — टूथपिक
भारत के लगभग हर होटल के दरवाज़े पर टूथपिक का कटोरा रखा होता है, और हममें से ज़्यादातर उसे इस्तेमाल करते हैं।
टूथपिक फँसा हुआ टुकड़ा हटा सकती है, और उस एक काम के लिए वह ठीक है। रोज़ की सफाई के तरीके के तौर पर यह नुकसान करती है।
यह इतनी मोटी और सख्त है कि दाँत की गोलाई के साथ नहीं चल सकती। दाँत की बगल से प्लाक पोंछने के बजाय यह दो दाँतों के बीच के मसूड़े के छोटे त्रिकोण में घुसकर उसे दबा देती है। वह ऊतक दोबारा नहीं उगता, और जो जगह बचती है उसमें और खाना फँसता है।
इंटरडेंटल ब्रश इसकी सीधी जगह ले लेता है। वही जेब, खाने के बाद वही पल, और वह काम जो टूथपिक सिर्फ करने का दिखावा करती है।
जिंजिवाइटिस, खून आते मसूड़े और पायरिया
बीमारी का नाम साफ लेना ज़रूरी है, क्योंकि लोग असल में इसी से डरते हैं।
जिंजिवाइटिस
जिंजिवाइटिस मसूड़े की वह सूजन है जो बिना छेड़े बैठे प्लाक से होती है। यह लालपन, सूजन, टीस और ब्रश करते समय खून के रूप में दिखती है। यह बहुत आम है और इस दौर में पूरी तरह पलटी जा सकती है। लगातार प्लाक हटाइए और सूजन बैठ जाती है।
मसूड़ों से खून आना
खून आना एक लक्षण है, सफाई का सामान्य हिस्सा नहीं। जो मसूड़े पहले से सूजे हैं, उनसे ठीक से दाँतों के बीच सफाई शुरू करने पर पहले एक-दो हफ्ते थोड़ा खून आता है, और फिर बैठ जाता है। ज़्यादा खून आए, या दो हफ्ते बाद भी बना रहे, तो और ज़ोर लगाने की नहीं, डेंटिस्ट की ज़रूरत है।
पायरिया, और दौर क्यों मायने रखता है
जिंजिवाइटिस किसी कमज़ोर आदमी में चलती रहे तो वह पीरियोडोंटाइटिस बन जाती है — वही जिसे भारत में लगभग हर आदमी पायरिया कहता है। सूजन हड्डी और दाँत को थामे रखने वाली जकड़न तक पहुँच जाती है। वह नुकसान सफाई से नहीं पलटता।
उस दौर में भी इंटरडेंटल ब्रश रोज़ के प्लाक काबू का हिस्सा रहता है। पर वह उसका इलाज नहीं है। एक बार दाँत ढीले हो जाएँ या मसूड़े साफ दिखते हुए पीछे हटने लगें, तो काम की चीज़ डेंटिस्ट है, बेहतर ब्रश नहीं।
इंटरडेंटल ब्रश किस काम आते हैं
- दाँतों के बीच का प्लाक हटाना, जहाँ टूथब्रश कभी नहीं पहुँचता।
- जिंजिवाइटिस घटाना। ब्रश करने के साथ इस्तेमाल करने पर ये अकेले ब्रश करने से ज़्यादा प्लाक और सूजन घटाते हैं।
- कुछ हफ्ते रोज़ इस्तेमाल से मसूड़ों से खून आना घटाना।
- क्राउन, ब्रिज, फिलिंग, पक्के रिटेनर और तारों के आसपास सफाई, जहाँ प्लाक फँसता है।
- मसूड़े पीछे हटने या पुरानी बीमारी से बनी चौड़ी जगहों की सफाई, जहाँ फ्लॉस बिना ज़्यादा छुए फिसल जाता है।
- पायरिया का इलाज करा रहे लोगों के लिए रोज़ का प्लाक काबू, बशर्ते नाप सही हो।
- डेंटल इम्प्लांट के आसपास सफाई। इम्प्लांट वाले ब्रश में तार पर परत चढ़ी होती है ताकि इम्प्लांट की सतह पर खरोंच न लगे।
फायदे
- ये गैप के अंदर की दाँत सतहों तक सचमुच पहुँचते हैं और वहाँ का प्लाक तोड़ते हैं।
- जिन जगहों में ये घुस जाते हैं, वहाँ ज़्यादातर स्टडी में ये मसूड़ों की सूजन और खून फ्लॉस से ज़्यादा घटाते हैं।
- ये फ्लॉस से संभालने में आसान हैं, जो बुज़ुर्गों और अकड़ी उँगलियों वालों के लिए मायने रखता है।
- ये उन मुँहों पर बैठते हैं जहाँ मसूड़ों की बीमारी है, क्योंकि वहाँ जगह पहले से चौड़ी होती है।
- ये तारों के आसपास काम करते हैं, जो भारतीय किशोरों और जवानों में लगातार आम होते जा रहे हैं।
- ये कई नापों में आते हैं, इसलिए एक ही मुँह के अलग-अलग गैप ठीक से साफ हो सकते हैं।
- लोग इन्हें सचमुच चलाते रहते हैं, और यही वह फायदा है जो बाकी सब तय करता है।
भारत में कौन-कौन से मिलते हैं
इस सूची का हर प्रकार यहाँ आसानी से नहीं मिलता। सादे बेलनाकार और नुकीले ब्रश हर जगह बिकते हैं। खास वाले आमतौर पर डेंटल क्लीनिक से या ऑनलाइन ऑर्डर से आते हैं।
बेलनाकार
ब्रिसल कोर के चारों तरफ बराबर लगे होते हैं। उन गैप के लिए ठीक जो आगे से पीछे तक लगभग एक जैसे चौड़े हों। भारतीय केमिस्ट और ऑनलाइन पैक में यही आम प्रकार है।
नुकीला या शंकु जैसा
सिरे पर पतला, नीचे चौड़ा। उस गैप में शुरू करना आसान जो मुँह पर सटा हो और अंदर खुल जाता हो। अगर आपको अपना नाप नहीं पता, तो पहली खरीद के लिए यही समझदारी है।
टेढ़े सिर वाला
हेड हैंडल से कोण पर बैठा होता है, जिससे पीछे के दाँत तक पहुँच बनती है। एक बार दाढ़ें ठीक से साफ करने लगें तो यह रखने लायक है, क्योंकि वहीं ज़्यादातर लोग हार मान लेते हैं।
सीधा
सादा और सस्ता, आगे के दाँतों के लिए सबसे अच्छा। बहुत से पैक में सारे सीधे ही होते हैं, और यही एक वजह है कि लोग आगे अच्छी सफाई करते हैं और पीछे खराब।
लचीला
मुड़ने वाली गर्दन या कोर। पीछे के दाँतों में काम का, और तरीका अभी कच्चा हो तो ज़्यादा माफ करने वाला।
रबर वाले पिक
तार पर ब्रिसल के बजाय नरम रबर के काँटे। आरामदेह, लोकप्रिय, और साथ ले जाने में आसान। इनके पीछे सबूत ब्रिसल वाले ब्रश से कम हैं, इसलिए इन्हें सुविधा वाला विकल्प मानिए, सबसे अच्छा नहीं।
इम्प्लांट वाले ब्रश
तार पर परत चढ़ी होती है, ताकि इम्प्लांट पर खरोंच न लगे। अगर आपके इम्प्लांट लगे हैं, तो दुकान की शेल्फ से अंदाज़ा लगाने के बजाय उसी क्लीनिक से पूछिए जिसने वे लगाए थे।
पूरी बात नाप की है
नाप ब्रांड, प्रकार और कीमत — तीनों से ज़्यादा मायने रखता है।
एक ही मुँह के गैप एक जैसे चौड़े नहीं होते। हर जगह एक ही नाप चलाने का मतलब है कुछ गैप खुरचे जाएंगे और कुछ छूट जाएंगे।
सही नाप वाले ब्रश को यह करना चाहिए:
- बिना ज़ोर लगाए गैप में घुस जाए
- जाते समय दोनों दाँत की सतहें छुए
- तार मुड़े बिना बाहर आ जाए
- तेज़ दर्द न करे
बहुत छोटा
यह बिना कुछ छुए निकल जाता है। अच्छा महसूस होता है और सफाई कुछ नहीं करता। खुद ब्रश खरीदने वालों में यही ज़्यादा आम गलती है।
बहुत बड़ा
इसे धकेलना पड़ता है, यह अटकता है, दर्द करता है, और तार मुड़ जाता है। इसे ज़ोर से घुसाना मसूड़े के त्रिकोण को ठीक वैसे ही नुकसान पहुँचाता है जैसे टूथपिक। कभी ज़ोर मत लगाइए।
जब कोई आपका नाप न बताए, तो नाप कैसे चुनें
सबसे अच्छी सूरत यह है कि डेंटिस्ट या हाइजीनिस्ट आपके गैप नापकर बता दें कि कौन से नाप खरीदने हैं। अगली स्केलिंग की मुलाकात में यह माँगने लायक है, और इसमें दो मिनट लगते हैं।
भारत में ज़्यादातर लोग बिना उसके ही खरीदेंगे। अगर आप भी वही हैं:
- एक नाप के बजाय मिले-जुले नाप वाला पैक लीजिए। एक बार थोड़ा ज़्यादा खर्च होगा, पर दो बार गलत खरीदने से बच जाएंगे।
- सबसे छोटे से शुरू करके गैप दर गैप ऊपर बढ़िए, जब तक वह न मिल जाए जो बिना धक्के दोनों तरफ छूता है।
- आगे छोटा और पीछे बड़ा नाप चाहिए होगा, यह मानकर चलिए।
- पहले हफ्ते लिख लीजिए कि कौन सा नाप कहाँ बैठता है। उसके बाद ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
- अगर किसी गैप में बिना ज़ोर कुछ नहीं घुसता, तो वह गैप फ्लॉस वाला है। उसे छोड़िए और वहाँ फ्लॉस चलाइए।
इसे इस्तेमाल कैसे करें
- उस गैप के लिए वह नाप चुनिए जो बिना ज़ोर घुसता हो।
- उसे दो दाँतों के बीच मसूड़े की किनार पर रखिए और मसूड़े के साथ हल्का कोण दीजिए।
- धीरे से अंदर धकेलिए। न जाए तो रुकिए और छोटा नाप लीजिए।
- दो-तीन बार अंदर-बाहर कीजिए ताकि ब्रिसल दोनों दाँत की सतहें पोंछ दें।
- पूरे मुँह में रोज़ एक ही क्रम से चलिए, ताकि कुछ छूटे नहीं।
- बीच-बीच में ब्रश को बहते पानी में धोते चलिए।
- आखिर में इसे ठीक से धोकर, झाड़कर, खड़ा करके सुखाइए। नमी वाले बाथरूम में डिब्बे में बंद गीला ब्रश गीला ही रहता है।
- ब्रिसल फैल जाएँ या तार मुड़ जाए तो फेंक दीजिए। यह आमतौर पर एक-दो हफ्ते में होता है, महीने भर में नहीं।

ब्रश से पहले या बाद?
पहले दाँतों के बीच सफाई कीजिए, फिर ब्रश। यूरोपीय गाइडलाइन यही कहती है, और इसका मतलब है कि टूथपेस्ट का फ्लोराइड उन सतहों तक पहुँचता है जो अभी-अभी साफ हुई हैं।
पर क्रम इस बात से कहीं कम मायने रखता है कि आप यह कर रहे हैं या नहीं। वही चुनिए जिसे आप निभा पाएंगे।
इंटरडेंटल ब्रश या फ्लॉस?
ये आपस में बदले नहीं जा सकते, और जवाब आपकी पसंद से नहीं, आपके अपने गैप से तय होता है।
| स्थिति | बेहतर औज़ार | क्यों |
|---|---|---|
| गैप इतना चौड़ा कि सबसे छोटा ब्रश घुस जाए | इंटरडेंटल ब्रश | दोनों सतहों तक पहुँचता है, चलाना आसान, सूजन घटाने के सबूत बेहतर |
| दाँत सटे हुए, ब्रश घुसता ही नहीं | फ्लॉस | उस जगह में यही एक चीज़ जाती है |
| मसूड़े पीछे हटे, बीमारी के बाद चौड़े गैप | इंटरडेंटल ब्रश | फ्लॉस बिना ज़्यादा छुए फिसल जाता है |
| तार, ब्रिज, इम्प्लांट | इंटरडेंटल ब्रश | सामान के चारों तरफ घूम जाता है |
| अकड़े या काँपते हाथ | इंटरडेंटल ब्रश | पकड़ना और जगह पर रखना कहीं आसान |
| एक ही मुँह में दोनों तरह के गैप | दोनों | यह आम है और सामान्य भी |
एक कोक्रेन समीक्षा में मिला कि इंटरडेंटल ब्रश मसूड़ों की सूजन फ्लॉस से ज़्यादा घटा सकते हैं, हालाँकि उसने सबूत की निश्चितता कम आँकी। दिशा एक जैसी है। फायदे का आकार तय नहीं है।
नुकसान, ईमानदारी से
- ये हर गैप में नहीं बैठते। सटे हुए दाँतों में सबसे छोटा ब्रश भी नहीं घुसता।
- गलत नाप ठीक वही नुकसान करता है जिससे आप बचना चाहते थे।
- आपको शायद एक से ज़्यादा नाप चाहिए होंगे, यानी एक ब्रश नहीं, पूरा पैक।
- धातु का कोर अजीब लग सकता है, खासकर जब उस पर चढ़ी परत घिस जाए।
- ये जल्दी घिसते हैं और बदलने पड़ते हैं, यानी थोड़ा बार-बार का खर्च।
- तरीका फिर भी मायने रखता है। गैप में ब्रश घुसा देना और उसे साफ करना एक बात नहीं है।
- खुले में बिकने वाले और क्लीनिक में रखे ब्रश की गुणवत्ता में बहुत फर्क होता है। जिस तार का दूसरी बार में ही मुड़ जाना तय हो, वह सस्ता सौदा नहीं है।
क्या इनसे मसूड़े खराब हो सकते हैं?
हाँ, अगर गलत तरीके से चलाए जाएँ।
सही नाप वाले ब्रश को किसी ज़ोर की ज़रूरत नहीं होती। दबाव, बड़ा ब्रश, या आरी जैसी सख्त हरकत मसूड़े को घायल करती है। मकसद मसूड़ों से खून निकालना नहीं है।
पहले हफ्ते थोड़ा खून आना अपेक्षित है, जब मसूड़े पहले से सूजे हों, और प्लाक काबू में आते ही यह घटना चाहिए। ज़्यादा खून, या दो हफ्ते से आगे बना रहने वाला खून, वह चीज़ नहीं है जिसे झेलते हुए चलते रहा जाए। उसके लिए डेंटिस्ट चाहिए।
और एक चेतावनी जो खास तौर पर भारत की है। अगर आप किसी भी रूप में तंबाकू लेते हैं, तो बीमारी बढ़ जाने पर भी मसूड़ों से खून नहीं आ सकता, क्योंकि तंबाकू खून की नलियाँ सिकोड़ देती है। तंबाकू लेने वाले में खून का न आना कोई तसल्ली नहीं है।
सबसे अच्छा इंटरडेंटल ब्रश असल में कौन सा है
कोई एक सबसे अच्छा ब्रांड नहीं है। आपके मसूड़ों के लिए सबसे अच्छा ब्रश वह है जो बिना ज़ोर आपके गैप में बैठे और दोनों दाँत की सतहें छुए। जो इतना आरामदेह हो कि आप उसे रोज़ रात चलाएँ। और जो आपके मुँह में जो लगा है उसके लिए सही हो।
मान लीजिए किसी के मसूड़ों से खून आता है या पायरिया का इतिहास है, और गैप ब्रश लायक चौड़े हैं। उनके लिए सही नाप का इंटरडेंटल ब्रश घर पर रोज़ की जा सकने वाली सबसे मजबूत सबूत वाली चीज़ों में है।
नाप और बनावट देखकर खरीदिए, डिब्बे पर लिखे नाम से नहीं।
किसे सबसे ज़्यादा फायदा
जिनके मसूड़ों से खून आता है, या जिन्हें पायरिया का इतिहास है। जिनके मसूड़े पीछे हटने से गैप चौड़े हैं। जिनके तार, ब्रिज या इम्प्लांट लगे हैं। और जिनके हाथ अकड़े होने से फ्लॉस मुश्किल है।
मसूड़ों की बीमारी का इलाज करा रहे किसी भी आदमी के लिए नाप और तरीका ठीक मुँह वाले से ज़्यादा मायने रखते हैं। इसलिए यह डेंटिस्ट के दो मिनट माँगने लायक है।
कब ज़ोर नहीं लगाना
बहुत सटे हुए संपर्क में ब्रश ज़बरदस्ती मत घुसाइए। न ही उस जगह जहाँ तेज़ दर्द हो या यह हर बार अटकता हो। न वहाँ जहाँ हर बार ज़्यादा खून आता हो, या किसी ऐसी भराई के आसपास जहाँ यह ठीक से बैठता ही न हो।
इनमें से कोई भी बात डेंटिस्ट से यह पूछने की वजह है कि उस खास गैप के लिए कौन सा तरीका ठीक है। ज़्यादा ज़ोर लगाने की वजह नहीं।
कितनी बार
दिन में एक बार, रोज़। ज़्यादातर लोगों को रात, खाने के बाद, सबसे आसान लगती है।
दिन में एक बार ठीक से करना, रविवार को तीन बार करके अगले रविवार तक भूल जाने से बेहतर है।
क्या इससे मसूड़ों की बीमारी रुकती है?
यह जिंजिवाइटिस को रोकता और पलटता है, और वहीं से मसूड़ों की बीमारी शुरू होती है। यह असली और काम का दावा है।
यह जम चुके पायरिया का इलाज नहीं करता। उसके लिए मसूड़े के नीचे पेशेवर सफाई चाहिए, कभी उससे ज़्यादा भी, और फिर नतीजा टिकाए रखने के लिए रोज़ का प्लाक काबू।
अगर किसी डेंटिस्ट ने साल भर से आपके मसूड़े नहीं देखे, तो स्केलिंग करा लीजिए। यह भारतीय इलाज की सबसे सस्ती चीज़ों में है, और इससे पता चलता है कि आप इन दो हालात में से किसमें हैं।
खास बातें
इंटरडेंटल ब्रश दाँतों के बीच की वे सतहें साफ करता है जिन्हें टूथब्रश कभी नहीं छूता। मसूड़ों की बीमारी वहीं से शुरू होती है।
सब कुछ नाप तय करता है। ब्रश बिना ज़ोर घुसना चाहिए। मिले-जुले नाप वाला पैक लीजिए, और मान लीजिए कि मुँह के अलग-अलग हिस्सों में अलग नाप चलेंगे।
यह टूथपिक की ईमानदार जगह है, जो वक्त के साथ दाँतों के बीच का मसूड़ा खराब करती है।
जहाँ ब्रश बैठता है, वहाँ वह फ्लॉस से बेहतर काम करता है। जहाँ दाँत सटे हैं, वहाँ फ्लॉस ही औज़ार है। बहुत से मुँहों में दोनों चाहिए।
पहले हफ्ते थोड़ा खून आना सामान्य है। दो हफ्ते बाद भी आना सामान्य नहीं है, और उसके लिए डेंटिस्ट चाहिए।
अगर आप तंबाकू लेते हैं, तो बीमारी बढ़ी होने पर भी मसूड़ों से खून नहीं आ सकता। शांत मसूड़ों को सेहतमंद मसूड़े मत समझिए।
साल में एक बार दाँतों की स्केलिंग कराइए। यह सस्ती है, और मसूड़ों की बीमारी दाँत खोने से पहले इसी तरह पकड़ी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इंटरडेंटल ब्रश क्या है?
एक छोटा ब्रश, जिसमें पतले तार या लचीले कोर के चारों तरफ ब्रिसल लगे होते हैं। यह दो दाँतों के बीच की उस जगह की सफाई के लिए बना है जहाँ टूथब्रश नहीं पहुँचता। यह कई नापों और कुछ आकारों में आता है।
भारत में इंटरडेंटल ब्रश कहाँ मिलेंगे?
बड़े केमिस्ट रखते हैं, डेंटल क्लीनिक आमतौर पर बेचते हैं, और सारे नाप एक साथ ऑनलाइन सबसे आसानी से मिलते हैं। बिना डेंटिस्ट से नाप लिए खरीद रहे हैं तो एक नाप के बजाय मिले-जुले नाप वाला पैक लीजिए।
क्या इंटरडेंटल ब्रश फ्लॉस से बेहतर हैं?
जहाँ गैप ब्रश लायक चौड़ा है, वहाँ मसूड़ों की सूजन घटाने में सबूत ब्रश के पक्ष में हैं। जहाँ दाँत सटे हुए हैं, वहाँ सिर्फ फ्लॉस घुसता है। बहुत लोगों को दोनों चाहिए।
क्या इसकी जगह टूथपिक चलेगी?
नहीं। टूथपिक एक टुकड़ा हटा सकती है, पर रोज़ के तरीके के तौर पर वह दाँतों के बीच के मसूड़े में दबकर उसे बैठा देती है, और वह ऊतक दोबारा नहीं उगता।
क्या दातुन काफी है?
वह जिन सतहों को छूती है उन्हें साफ करती है, और कुछ लोग उससे ठीक भी चलाते हैं। पर वह दाँतों के बीच नहीं जाती। दाँत की सतहों पर आप जो भी चलाएँ, गैप के लिए उनका अपना औज़ार चाहिए।
कैसे पता चले कि ब्रश बहुत बड़ा है?
आपको उसे धकेलना पड़े, वह अटके, दर्द हो, या घुसते समय तार मुड़ जाए। इनमें से कुछ भी हो तो अगला छोटा नाप लीजिए।
कैसे पता चले कि वह बहुत छोटा है?
वह आसानी से निकल जाए और कुछ छुए ही नहीं। अगर हल्का सा भी अटकाव महसूस न हो, तो वह दाँत की बगल साफ नहीं कर रहा।
इसे चलाते ही मसूड़ों से खून आता है। क्या बंद कर दूँ?
आमतौर पर नहीं। सूजे हुए मसूड़ों से अक्सर पहले एक-दो हफ्ते खून आता है और फिर प्लाक साफ होते ही बैठ जाता है। खून ज़्यादा हो, या दो हफ्ते बाद भी आता रहे, तो डेंटिस्ट को दिखाइए।
मैं गुटखा लेता हूँ। मेरे मसूड़ों से खून नहीं आता, तो क्या वे ठीक हैं?
ज़रूरी नहीं। तंबाकू से खून आना घट जाता है, इसलिए तंबाकू लेने वाले के मसूड़े शांत दिखते हुए भी बीमारी बढ़ी हो सकती है। खून से अंदाज़ा लगाने के बजाय उन्हें जँचवाइए।
क्या यह टार्टर हटा सकता है?
नहीं। यह नरम प्लाक हटाता है। प्लाक एक बार सख्त होकर टार्टर बन जाए, तो उसे सिर्फ डेंटिस्ट की स्केलिंग हटाती है।
क्या इससे मुँह की बदबू में फायदा होगा?
अक्सर हाँ, जब बदबू दाँतों के बीच के प्लाक और फँसे खाने से आ रही हो। अच्छी सफाई के बावजूद बनी रहने वाली बदबू की वजह कुछ और है और उसे जँचवाना चाहिए।
एक ब्रश कितने दिन चलता है?
रोज़ इस्तेमाल से आमतौर पर एक से दो हफ्ते। ब्रिसल फैल जाएँ या तार मुड़ जाए तो बदल दीजिए। हर इस्तेमाल के बीच इसे धोकर खड़ा करके सुखाइए। नमी वाले बाथरूम में बंद डिब्बे में रखा गीला ब्रश सूखता ही नहीं।
क्या इस पर टूथपेस्ट लगाना चाहिए?
नहीं। सफाई मशीनी है। ब्रश पर टूथपेस्ट लगाने से कुछ नहीं जुड़ता।
मसूड़ों से खून आने पर डेंटिस्ट के पास कब जाऊँ?
अगर अच्छी सफाई के बावजूद नियमित खून आए, ज़्यादा खून आए, मसूड़े सूजे या दुखते हों, लगातार लाल दिखें, पीछे हट रहे हों, उनमें पीप हो, या कोई दाँत ढीला लगे। और तब भी, जब अच्छी सफाई के बावजूद साँस की बदबू बनी रहे।
याद रखने लायक एक नियम क्या है?
कभी ज़ोर मत लगाइए। अगर वह आराम से नहीं घुसता, तो छोटा नाप लीजिए या उस गैप में फ्लॉस चलाइए।
अस्वीकरण
यह लेख सिर्फ आम जानकारी के लिए है और किसी योग्य डेंटिस्ट की निजी सलाह, जाँच या इलाज की जगह नहीं लेता। अगर आपके मसूड़ों से लगातार खून आता है, कोई दाँत ढीला लगता है, या आप किसी भी रूप में तंबाकू लेते हैं — तो घर के रूटीन के भरोसे मत रहिए। डेंटिस्ट को दिखाइए।
संदर्भ
- Indian Dental Association. Oral hygiene guidance for adults. ⚑
- Worthington HV, MacDonald L, Poklepovic Pericic T, et al. Home use of interdental cleaning devices, in addition to toothbrushing, for preventing and controlling periodontal diseases and dental caries. Cochrane Database of Systematic Reviews. 2019;4:CD012018.
- Sanz M, et al. Efficacy of inter-dental mechanical plaque control in managing gingivitis. Journal of Clinical Periodontology.
- Kotsakis GA, Lian Q, Ioannou AL, et al. A network meta-analysis of interproximal oral hygiene methods in the reduction of clinical indices of inflammation. Journal of Periodontology. 2018.
- Slot DE, Dorfer CE, Van der Weijden GA. The efficacy of interdental brushes on plaque and parameters of periodontal inflammation: a systematic review.
- European Federation of Periodontology. Gum disease: Prevention. EFP Patient Information.
- European Federation of Periodontology. Guideline on treatment of stage I-III periodontitis.
- National Oral Health Programme, Ministry of Health and Family Welfare, Government of India. ⚑