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टॉन्सिल स्टोन के लिए वॉटर फ्लॉसर: क्या यह सचमुच काम करता है?

टॉन्सिल स्टोन

भारत में ज़्यादातर लोगों की टॉन्सिल स्टोन से पहली मुलाकात एक जैसी होती है। ब्रश या गरारे करते समय कोई छोटी, हल्के रंग की चीज़ बाहर आ जाती है। उसमें से उसके आकार से कहीं ज़्यादा बदबू आती है। और इंटरनेट पर टॉन्सिलोलिथ नाम मिलता है।

टॉन्सिल स्टोन, या गले की पथरी, वे छोटी सख्त चीज़ें हैं जो टॉन्सिल की तहों में बनती हैं। ये आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होतीं।

पर इनसे ऐसी बदबू आ सकती है जो ब्रश करने से नहीं जाती। गले में तकलीफ रह सकती है, निगलने में दिक्कत हो सकती है, और ऐसा लग सकता है कि गले के पीछे कुछ अटका है।

“टॉन्सिल स्टोन के लिए वॉटर फ्लॉसर” अब घर पर हल ढूँढने के आम तरीकों में से एक बन गया है। भारत में इसमें एक और पेच है — इतनी छोटी दिक्कत के लिए बिजली वाला वॉटर फ्लॉसर काफी महँगी खरीदारी है। और ज़्यादातर केमिस्ट की दुकान पर पड़ा सस्ता औज़ार वही काम ज़्यादा नरमी से कर देता है।

यह लेख बताता है कि टॉन्सिल क्या हैं और पथरी क्यों बनती है। वॉटर फ्लॉसर क्या कर सकता है और क्या नहीं। सस्ते विकल्प क्या हैं। और वह जगह कौन सी है जहाँ घर पर कोशिश बंद करके ENT को दिखाना चाहिए।

एक नज़र में

वॉटर फ्लॉसर छोटी और ढीली बैठी टॉन्सिल स्टोन को बहा सकता है, और यह टॉन्सिल में पिन या टूथपिक चुभोने से कहीं ज़्यादा सुरक्षित है। यह इलाज नहीं है, और तह में गहरी फँसी पथरी इससे नहीं निकलेगी।

पूरा खतरा दबाव में है। मशीन में जो सबसे कम सेटिंग हो, वही रखिए। टॉन्सिल का ऊतक नाज़ुक लिम्फॉइड ऊतक है, मसूड़ा नहीं। तेज़ धार से दर्द, खून और सूजन हो सकती है।

कोई मशीन खरीदने से पहले दो रुपये वाला तरीका आज़माइए। कम दबाव वाली ओरल इरिगेशन सिरिंज किसी भी केमिस्ट पर मिलती है, और उससे बिजली वाली मशीन से ज़्यादा काबू रहता है, कीमत का तो कहना ही क्या। और गुनगुने नमक के पानी से गरारा, जो ज़्यादातर भारतीय घरों में वैसे भी होता है, सबसे सुरक्षित पहला कदम है।

और वह जवाब जिसकी ज़्यादातर लोग उम्मीद नहीं करते — अगर आपकी टॉन्सिल स्टोन आपको परेशान नहीं कर रही, तो उसे निकालने की ज़रूरत ही नहीं है।

टॉन्सिल

टॉन्सिल क्या हैं?

टॉन्सिल गले के पीछे लिम्फॉइड ऊतक के दो गुच्छे हैं, हर तरफ एक। ये इम्युनिटी का हिस्सा हैं और मुँह व नाक से आने वाले बैक्टीरिया और वायरस को रोकने में मदद करते हैं।

हर टॉन्सिल की सतह छोटी-छोटी जेबों में मुड़ी होती है, जिन्हें टॉन्सिलर क्रिप्ट कहते हैं। इन तहों से सतह बढ़ जाती है, जिससे टॉन्सिल अपना काम बेहतर करता है।

इन्हीं तहों में मरे हुए सेल, खाने के कण, बलगम और बैक्टीरिया फँसते भी हैं। जब वह सामान काफी देर पड़ा रहकर सख्त हो जाता है, तो टॉन्सिल स्टोन बन जाती है।

टॉन्सिल स्टोन क्या हैं?

टॉन्सिल स्टोन टॉन्सिलर क्रिप्ट के अंदर जमी कैल्शियम वाली चीज़ें हैं। मेडिकल नाम टॉन्सिलोलिथ है। लोग इन्हें गले की पथरी भी कहते हैं।

ये बहुत छोटे सफेद या पीले कण से लेकर गले के पीछे साफ दिखने वाली गाँठ तक हो सकती हैं। छोटे मटर जितनी पथरी आम नहीं है, पर दुर्लभ भी नहीं। और बड़ी वाली के लिए घर का तरीका नहीं, डॉक्टर चाहिए।

ये लोगों की सोच से कहीं ज़्यादा आम हैं। बहुत लोग इन्हें बिना जाने ही ढोते रहते हैं, और ये अक्सर खाते, खाँसते या गरारा करते समय अपने आप निकल जाती हैं।

आम लक्षण

बहुत सी पथरी कोई लक्षण नहीं देतीं। जब देती हैं तो आम शिकायतें ये होती हैं। ऐसी बदबू जो जाती नहीं, गले में दर्द, कान में दर्द, निगलने में दिक्कत। मुँह में धातु जैसा या खराब स्वाद, गले में लगातार खराश, गले में कुछ अटका होने का एहसास, और टॉन्सिल पर दिखने वाले सफेद या पीले कण।

मुँह की बदबू ही सबसे आम वजह है जिससे लोगों को इनका पता चलता है। पथरी के अंदर के बैक्टीरिया सल्फर वाले यौगिक बनाते हैं। इसीलिए निकली हुई पथरी अपने आकार से कहीं तेज़ बदबू देती है।

भारतीय पेच — इसे अक्सर कुछ और समझ लिया जाता है

यहाँ दो चीज़ें इतनी बार टॉन्सिल स्टोन समझ ली जाती हैं कि उनका नाम लेना ज़रूरी है।

बार-बार होने वाला टॉन्सिलाइटिस। भारत के बहुत से बड़ों को बचपन में बताया गया था कि उन्हें “टॉन्सिल की दिक्कत” है। उसके बाद गले का कोई भी लक्षण उसी खाते में चला जाता है। पथरी और इन्फेक्शन अलग चीज़ें हैं और इनका इलाज भी अलग है।

टॉन्सिल पर कोई भी सफेद चीज़। सफेद धब्बा अपने आप पथरी नहीं होता। फंगस का इन्फेक्शन, गले के इन्फेक्शन के बाद बची परत, और कुछ ज़्यादा गंभीर वजहें — ये सब बाथरूम के शीशे में सफेद ही दिखती हैं।

अगर कोई सफेद धब्बा हटता नहीं और दो हफ्ते में बदला भी नहीं, तो उसे पानी की धार नहीं, डॉक्टर की नज़र चाहिए।

टॉन्सिल स्टोन किसे होती है? आम वजहें

टॉन्सिल स्टोन गंदगी की सज़ा नहीं है। कुछ लोगों के टॉन्सिल का आकार ही ऐसा होता है। जानी-मानी वजहें ये हैं। गहरी या बड़ी टॉन्सिलर क्रिप्ट, बार-बार टॉन्सिलाइटिस का इतिहास, मुँह का लगातार सूखा रहना। नाक से पीछे टपकने वाला बलगम, किशोर या जवान होना, और तंबाकू।

इनमें से दो को भारत में विदेशी लेखों से ज़्यादा वजन मिलना चाहिए।

तंबाकू। गुटखा, खैनी, ज़र्दा, पान मसाला और सिगरेट — ये सब मुँह सुखाते हैं, उसमें रहने वाले बैक्टीरिया बदल देते हैं, और गले के पीछे के ऊतक को चिढ़ाते हैं।

बिना धुएँ वाली तंबाकू यहाँ बहुत ज़्यादा चलती है, और उसे चलाने वाले कई लोग खुद को धूम्रपान करने वाला मानते ही नहीं। अगर आप इनमें से कुछ भी लेते हैं, तो कोई मशीन खरीदने से बहुत पहले यही पहला काम है।

नाक से पीछे टपकता बलगम। भारतीय शहरों में एलर्जी वाला ज़ुकाम और साइनस की दिक्कत बहुत आम है। और गले के पीछे लगातार टपकता बलगम उन तहों को भरता रहता है। बार-बार बनने वाली पथरी में नाक का इलाज अक्सर टॉन्सिल पर की गई किसी भी कोशिश से ज़्यादा काम करता है।

अगर इनमें से कई बातें आप पर लागू होती हैं, तो निकालने के बाद भी पथरी लौटेगी। मशीन पर पैसा खर्च करने से पहले यह जान लेना ज़रूरी है। बचाव, और ज़रूरत पड़े तो ENT की सही राय, बार-बार घर पर निकालने से ज़्यादा मायने रखते हैं।

क्या वॉटर फ्लॉसर टॉन्सिल स्टोन निकाल सकता है?

वॉटर फ्लॉसर वह मशीन है जो दबाव के साथ पानी की धार दाँतों के बीच और मसूड़ों की किनार पर डालती है। कुछ लोग उसे टॉन्सिल की तह पर मोड़ देते हैं, ताकि पथरी बह जाए।

अगर पथरी छोटी है और ढीली बैठी है, तो पानी उसे बहा सकता है। पूरी तरकीब बस इतनी है। यह धुलाई है, खींचकर निकालना नहीं।

बहुत लोग कहते हैं कि यह काम कर गया। डॉक्टर ज़्यादा सावधान रहते हैं, क्योंकि टॉन्सिल नाज़ुक ऊतक है जिसे तेज़ धार चोट पहुँचा सकती है।

यह भी साफ रहे कि यह मशीन है क्या। इसे दाँतों के बीच सफाई के लिए बनाया गया था। टॉन्सिल पर इसका इस्तेमाल उस मकसद से बाहर है। बड़े अस्पताल इसे घर के विकल्पों में गिनाते ज़रूर हैं, पर कोई कंपनी इसे इस काम के लिए नहीं बेचती, और कोई क्लीनिकल ट्रायल नहीं बताता कि यह कितना काम करता है।

क्या भारत में यह खरीदने लायक है?

ईमानदारी से, सिर्फ टॉन्सिल स्टोन के लिए, आमतौर पर नहीं।

बिजली वाला वॉटर फ्लॉसर यहाँ असली खर्च है, और मेज़ पर रखने वाली मशीन तो और भी ज़्यादा। अगर आपके पास दाँतों के लिए पहले से है, तो बात अलग है। या अगर तार, ब्रिज या इम्प्लांट की वजह से वैसे भी खरीदनी थी। तब सबसे कम सेटिंग पर किसी दिखने वाली पथरी पर आज़माना ठीक है।

पर सिर्फ टॉन्सिल स्टोन निकालने के लिए इसे खरीदना मुश्किल से जायज़ है। केमिस्ट से मिलने वाली कम दबाव वाली ओरल इरिगेशन सिरिंज वही काम ज़्यादा काबू के साथ कर देती है, और पथरी वैसे भी लौटती रहेगी।

वॉटर फ्लॉसर के फायदे

  1. कुछ चुभोना नहीं पड़ता। गले में कोई नुकीली चीज़ नहीं जाती, और इसी से चोट लगने का सबसे बड़ा रास्ता बंद हो जाता है।
  2. छोटी पथरी पर काम करता है। तह में ढीली बैठी ऊपरी पथरी अक्सर हल्की धुलाई से बह जाती है।
  3. कुल मिलाकर मुँह की सफाई बेहतर होती है। दाँतों के लिए नियमित इस्तेमाल से मुँह में बैक्टीरिया और खाने का कचरा घटता है, जिससे नई पथरी की गुंजाइश कम हो सकती है।
  4. अपॉइंटमेंट की ज़रूरत नहीं। यह घर पर हो जाता है, जो तब मायने रखता है जब सबसे पास का ENT भी दिन भर का सफर हो।
  5. चुभोने से नरम है। पानी की धार हाथ में आई किसी चीज़ से खुरचने के मुकाबले कहीं कम नुकसान करती है।

नुकसान और खतरे

खतरे असली हैं पर लगभग सब टाले जा सकते हैं। और लगभग सब दबाव और तरीके से जुड़े हैं।

  1. ऊतक को चोट। तेज़ दबाव वाली सेटिंग टॉन्सिल को नुकसान पहुँचा सकती है, जिससे दर्द, सूजन या खून आ सकता है।
  2. अधूरी सफाई। गहरी धँसी पथरी पानी से नहीं निकलेगी।
  3. कचरा और अंदर चला जाना। निशाना गलत हो तो सामान तह में और भीतर धकेला जा सकता है।
  4. उल्टी जैसा मन। गले के पीछे पानी की धार से बहुत लोगों को उबकाई आती है।
  5. इन्फेक्शन का खतरा। ठीक से साफ न की गई मशीन चिढ़े हुए ऊतक में बैक्टीरिया पहुँचा देती है। और नमी वाले मौसम में पानी भरा छोड़ा गया टैंक जल्दी काई पकड़ता है।
  6. पानी की गुणवत्ता। वही पानी लीजिए जो आप पीते हैं। फिल्टर किया, उबालकर ठंडा किया, या बोतल का। कभी उस नल का नहीं जिसका पानी आप पीते न हों।
  7. दम घुटने का खतरा। धीरे-धीरे कीजिए, सिर आगे झुकाकर बेसिन के ऊपर रखिए, और बीच-बीच में रुककर निगलिए या थूकिए।
  8. हर किसी के लिए नहीं। खून की कोई बीमारी हो, खून पतला करने वाली दवा चलती हो, हाल में गले का ऑपरेशन हुआ हो, या टॉन्सिल में इन्फेक्शन चल रहा हो, तो यह तरीका बिल्कुल मत अपनाइए। छोटे बच्चों के लिए यह ठीक नहीं है।

वॉटर फ्लॉसर इस्तेमाल करते समय सावधानियाँ

  1. सबसे कम दबाव वाली सेटिंग से शुरू कीजिए। यही सबसे ज़रूरी सावधानी है।
  2. साफ, गुनगुना पीने का पानी लीजिए। न गरम, न सीधे नल का।
  3. पथरी पर सीधे नहीं, उसके बगल में निशाना लगाइए।
  4. दर्द या खून दिखते ही तुरंत रुक जाइए।
  5. हर इस्तेमाल के बाद टैंक खाली करके सुखाइए, और मशीन कंपनी के बताए तरीके से साफ कीजिए।
  6. लगे मत रहिए। दो-तीन हल्की कोशिशों में पथरी न हिले तो उसे छोड़िए और डॉक्टर को दिखाइए।
  7. टॉन्सिल में कभी कोई नुकीली चीज़ मत चुभोइए। पिन, सेफ्टी पिन, ईयरबड की डंडी, टूथपिक, नाखून — घर पर होने वाली गंभीर चोटें इसी तरह होती हैं।
टॉन्सिल

टॉन्सिल स्टोन हटाने के दूसरे तरीके

वॉटर फ्लॉसर आपके लिए नहीं है, तो विकल्प कुछ न करने से लेकर ऑपरेशन तक जाते हैं।

तरीकाकिसके लिए सबसे अच्छाखतराबात
कुछ न करनाजिन पथरी से कोई लक्षण नहींकुछ नहींअक्सर यही सही फैसला है
गुनगुने नमक के पानी का गराराछोटी पथरी, गले की खराशबहुत कमसबसे सुरक्षित पहला कदम, और ज़्यादातर भारतीय घरों की आदत
हल्की खाँसीढीली, ऊपरी पथरीबहुत कमकुछ खर्च नहीं
ओरल इरिगेशन सिरिंजज़्यादातर लोग जो धुलाई आज़माना चाहते हैंकमकिसी भी केमिस्ट पर सस्ती, बिजली वाली मशीन से नरम और ज़्यादा काबू वाली
वॉटर फ्लॉसर, सबसे कम सेटिंगछोटी, दिखने वाली, ढीली पथरीकम से मध्यमतभी समझदारी जब पहले से आपके पास हो; मकसद से बाहर का इस्तेमाल
रुई का फाहाएक साफ दिखने वाली पथरीमध्यमउबकाई और खून का खतरा
ENT से निकलवानाबड़ी या धँसी पथरीकम, डॉक्टर की निगरानी मेंयह भी पता चलता है कि ये बनती क्यों हैं
लेज़र या कोब्लेशन क्रिप्टोलिसिसबार-बार लौटने परप्रक्रिया वालातहों की गहराई घटाता है; बड़े शहरों में उपलब्ध
टॉन्सिलेक्टॉमीगंभीर, बार-बार के मामलेऑपरेशनपक्का हल, पर असली सर्जरी और असली आराम का समय

गुनगुने नमक के पानी का गरारा घर का सबसे सुरक्षित उपाय है। यह कचरा ढीला करता है, गले को आराम देता है और बैक्टीरिया घटाता है। ज़्यादातर भारतीय घरों में गले में खराश होते ही यही किया जाता है, इसलिए शुरुआत के लिए यह सबसे आसान चीज़ है।

कुछ छोटी पथरी एक ज़ोरदार खाँसी से अपने आप निकल आती हैं।

ज़्यादातर भारतीय पाठकों के लिए यह लेख असल में कम दबाव वाली ओरल इरिगेशन सिरिंज की सलाह देगा। यह लगभग हर केमिस्ट पर मिलती है और बहुत सस्ती है।

दबाव आपके अपने अंगूठे से तय होता है, इसलिए यह उससे तेज़ धार दे ही नहीं सकती जितनी आप चाहते हैं। इसमें गुनगुना नमक का पानी भरिए, पथरी के बगल में निशाना लगाइए, और हल्के से दबाइए।

रुई का फाहा कभी-कभी टॉन्सिल की सतह पर दिखने वाली पथरी को खिसका देता है। इसमें खून, चोट और तेज़ उबकाई का खतरा है।

ENT विशेषज्ञ सही औज़ारों से परेशान करने वाली पथरी सुरक्षित तरीके से निकाल सकते हैं, और यह भी बता सकते हैं कि वे बार-बार क्यों बनती हैं। भारत के ज़्यादातर शहरों में ENT की फीस पहुँच के अंदर है और उसके लिए पर्चे की ज़रूरत नहीं। यानी यह रास्ता लोगों की सोच से छोटा है।

लेज़र क्रिप्टोलिसिस तहों की गहराई घटाता है। कोब्लेशन क्रिप्टोलिसिस रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा से टॉन्सिल की सतह चिकनी करता है। दोनों बड़े भारतीय शहरों में उपलब्ध हैं और दोनों का खर्च जेब से जाता है।

टॉन्सिलेक्टॉमी में टॉन्सिल पूरे निकाल दिए जाते हैं। यह इकलौता पक्का जवाब है और यह असली सर्जरी है। भारत में यह आज भी काफी आसानी से किया जाता है, खासकर बार-बार इन्फेक्शन वाले बच्चों में। इसलिए सीधे पूछिए कि ऑपरेशन पथरी के लिए बताया जा रहा है या किसी और वजह से।

इन्हें दोबारा बनने से कैसे रोकें

अगर सवाल सिर्फ निकालने का नहीं, रोकने का है, तो लेख का यह हिस्सा ज़्यादा काम का है। क्योंकि ज़्यादातर लोगों में ये लौटेंगी।

  1. दिन में दो बार ब्रश कीजिए।
  2. रोज़ दाँतों के बीच सफाई कीजिए। इंटरडेंटल ब्रश या फ्लॉस से मुँह में कुल बैक्टीरिया घटते हैं। खाने के बाद टूथपिक इसमें नहीं गिनी जाती और वह मसूड़ा खराब करती है।
  3. जीभ साफ कीजिए। ज़्यादातर भारतीय घरों में जीभी पहले से है, और यह आदत बनाए रखने लायक है।
  4. पर्याप्त पानी पीजिए। लार मुँह का अपना कुल्ला है, और सूखा मुँह कचरे को टिकने देता है। गरम मौसम और लंबे सफर में यह कहना आसान है करना मुश्किल, इसलिए इसे जानबूझकर कीजिए।
  5. हर रूप में तंबाकू छोड़िए। गुटखा, खैनी, ज़र्दा, पान मसाला, सिगरेट। इस सूची की कोई और चीज़ इतना नहीं करेगी।
  6. नाक का इलाज कराइए। लगातार एलर्जी वाला ज़ुकाम या साइनस की दिक्कत उन तहों को भरती रहती है।
  7. एंटीबैक्टीरियल माउथवॉश तभी लीजिए जब डेंटिस्ट कहे, रोज़ की आदत बनाकर नहीं।
  8. साल में एक बार डेंटिस्ट को दिखाइए। स्केलिंग की फीस लोगों की सोच से कम होती है और यह सबसे सस्ती डेंटिस्ट्री है।

डॉक्टर के पास कब जाएँ?

ज़्यादातर टॉन्सिल स्टोन नुकसानदेह नहीं होतीं और उन्हें छोड़ा जा सकता है।

डॉक्टर को इन हालात में दिखाइए। पथरी बार-बार बनती हो, या मुँह की बदबू अच्छी सफाई के बावजूद बनी रहे। गले में ज़्यादा दर्द हो या निगलने में दिक्कत हो। बार-बार टॉन्सिल का इन्फेक्शन हो, या टॉन्सिल से खून आए। बड़ी पथरी सुरक्षित तरीके से न निकले, बुखार हो, या लक्षण रोज़ के काम में अड़चन बनें।

सिर्फ एक तरफ की सूजन जल्दी दिखानी चाहिए, और यह यहाँ लगभग हर जगह से ज़्यादा मायने रखती है। भारत में मुँह और गले के कैंसर का बोझ दुनिया में सबसे भारी में से है, जिसकी वजह तंबाकू और पान है। और ये कैंसर आमतौर पर देर से पकड़े जाते हैं। ⚑

एक तरफ की टिकी हुई सूजन, न बैठने वाली गाँठ, न भरने वाला छाला, या एक कान की तरफ जाता दर्द — इनके लिए ENT की जाँच चाहिए। बहुत मुमकिन है कुछ भी न हो। पर यह देखते-देखते इंतज़ार करने वाली चीज़ भी नहीं है।

खास बातें

वॉटर फ्लॉसर छोटी, ढीली बैठी पथरी हिला सकता है। गहरी वाली नहीं निकालेगा, और बार-बार बनने का इलाज तो बिल्कुल नहीं है।

सबसे कम दबाव वाली सेटिंग रखिए। असली खतरा दबाव में ही है।

ज़्यादातर भारतीय पाठकों के लिए सस्ती कम दबाव वाली ओरल इरिगेशन सिरिंज और गुनगुना नमक का पानी, मशीन खरीदने से बेहतर पहला औज़ार है।

टॉन्सिल में कभी कोई नुकीली चीज़ मत चुभोइए।

अगर पथरी से कोई लक्षण नहीं है, तो किसी इलाज की ज़रूरत नहीं है।

पथरी का लौटना आपके टॉन्सिल के आकार से आता है, सफाई की चूक से नहीं। हालाँकि तंबाकू और बिना इलाज की नाक इसे बिगाड़ते हैं।

दर्द, खून, बुखार, निगलने में दिक्कत, या एक तरफ की सूजन हो तो रुकिए और सलाह लीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या वॉटरपिक से टॉन्सिल स्टोन निकल सकती है?

कभी-कभी। वॉटरपिक वॉटर फ्लॉसर का एक ब्रांड है। यह तह में ढीली बैठी छोटी और दिखने वाली पथरी पर काम कर सकता है। सबसे कम दबाव रखिए, पथरी पर नहीं उसके बगल में निशाना लगाइए, और दर्द या खून दिखते ही रुक जाइए। यह डेंटल प्रोडक्ट का उसके मकसद से बाहर इस्तेमाल है।

क्या सिर्फ टॉन्सिल स्टोन के लिए भारत में वॉटर फ्लॉसर खरीदना चाहिए?

सिर्फ उसके लिए, आमतौर पर नहीं। यह बड़ी खरीदारी है, और केमिस्ट से मिलने वाली कम दबाव वाली ओरल इरिगेशन सिरिंज उसका छोटा सा हिस्सा खर्च करके ज़्यादा काबू देती है। दाँतों के लिए पहले से हो, या तार व इम्प्लांट की वजह से वैसे भी चाहिए हो, तो आज़माना ठीक है।

कौन सी दबाव सेटिंग रखूँ?

जो सबसे कम उपलब्ध हो। ये मशीनें उस दबाव के हिसाब से बनी हैं जो मसूड़े झेल सकते हैं, और टॉन्सिल का ऊतक मसूड़े से ज़्यादा नाज़ुक है।

क्या घर पर टॉन्सिल स्टोन निकालना सुरक्षित है?

छोटी, दिखने वाली पथरी के लिए नरम तरीके — नमक के पानी का गरारा, खाँसी, या कम दबाव वाली धुलाई — आमतौर पर सुरक्षित माने जाते हैं। जो सुरक्षित नहीं है वह है पिन, सेफ्टी पिन, टूथपिक या नाखून से खोदना, या तेज़ दबाव वाली धार चलाना।

क्या टॉन्सिल स्टोन अपने आप चली जाती हैं?

अक्सर हाँ। बहुत सी खाते, खाँसते या गरारा करते समय ढीली होकर निकल जाती हैं। अगर उनसे कोई लक्षण नहीं है, तो उन्हें छोड़ देना ठीक फैसला है।

मुझे बार-बार टॉन्सिल स्टोन क्यों होती है?

आमतौर पर आपके टॉन्सिल के आकार की वजह से, आपकी किसी गलती की वजह से नहीं। तंबाकू और बिना इलाज की नाक की एलर्जी इसे बिगाड़ती हैं। बार-बार लौटें तो ENT क्रिप्टोलिसिस या दूसरे विकल्पों पर बात कर सकते हैं, जो वजह पर काम करते हैं।

क्या टॉन्सिल स्टोन से मुँह से बदबू आती है?

आ सकती है। पथरी के अंदर के बैक्टीरिया सल्फर वाले यौगिक बनाते हैं। इसीलिए बदबू ही सबसे आम वजह है जिससे लोगों को इनका पता चलता है।

क्या वॉटर फ्लॉसर में नल का पानी डाल सकते हैं?

वही पानी लीजिए जो आप पीने को तैयार हों — फिल्टर किया, या उबालकर ठंडा किया, या बोतल का। और हर इस्तेमाल के बाद टैंक खाली करके सुखा दीजिए, उसमें पानी भरा मत छोड़िए।

क्या टॉन्सिल स्टोन खतरनाक हो सकती हैं?

बहुत कम। ये आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होतीं। पर बुखार, गले में तेज़ दर्द, निगलने या साँस लेने में दिक्कत, खून, या गले के एक तरफ सूजन हो तो डॉक्टर के पास जाइए।

शब्दावली

टॉन्सिलोलिथ: टॉन्सिल स्टोन का मेडिकल नाम, यानी टॉन्सिल की तह में जमी कैल्शियम वाली चीज़।

टॉन्सिलर क्रिप्ट: टॉन्सिल की सतह की कुदरती तहें और जेबें, जहाँ कचरा जमा होता है।

हैलिटोसिस: लगातार बनी रहने वाली मुँह की बदबू।

क्रिप्टोलिसिस: वह प्रक्रिया जो लेज़र या रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा से टॉन्सिल की तहों की गहराई घटाती है।

ओरल इरिगेटर: वॉटर फ्लॉसर का दूसरा नाम।

ओरल इरिगेशन सिरिंज: हाथ से चलने वाली सादी सिरिंज, जो कम दबाव पर मुँह या गला धोने के काम आती है।

निष्कर्ष

टॉन्सिल स्टोन के लिए वॉटर फ्लॉसर सबसे कम सेटिंग पर, किसी दिखने वाली छोटी पथरी पर आज़माना ठीक है — बशर्ते वह आपके पास पहले से हो। यहाँ ज़्यादातर लोगों के लिए सस्ती और नरम शुरुआत गुनगुना नमक का पानी और कम दबाव वाली सिरिंज है।

इनमें से कुछ भी इलाज नहीं है। अगर पथरी बार-बार लौटती है, तो काम की बातचीत किसी शॉपिंग ऐप से नहीं होनी चाहिए कि कौन सी मशीन लें। वह ENT से होनी चाहिए — कि ऐसा होता क्यों है, और तंबाकू व नाक का क्या करना है।

अस्वीकरण

यह लेख सिर्फ आम जानकारी के लिए है और किसी योग्य डॉक्टर की निजी सलाह, जाँच या इलाज की जगह नहीं लेता। गले के लक्षण बने रहें, पथरी बार-बार बने, या ऊपर बताए किसी चेतावनी वाले लक्षण दिखें, तो घर पर संभालने के बजाय डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ को दिखाइए।

संदर्भ

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  2. Mayo Clinic. All about tonsil stones. Mayo Clinic News Network.
  3. National Health Service (NHS). Tonsil stones (tonsilloliths).
  4. Indian Council of Medical Research, National Centre for Disease Informatics and Research. National Cancer Registry Programme report. ⚑
  5. Ferguson M, Aydin M, Mickel J. Halitosis and the tonsils: a review of management. Otolaryngology-Head and Neck Surgery, 2014.
  6. Mesolella M, Cimmino M, Di Martino M, et al. Tonsillolith: case report and review of the literature. Acta Otorhinolaryngologica Italica.
  7. Bhat V, Hegde KS. Tonsillolith: a rare clinical entity. Journal of Oral and Maxillofacial Pathology.
  8. Indian Dental Association. Oral hygiene guidance. ⚑

Authors

  • डॉ. वसुंधरा, MDS (ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी), BDS

    ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन

    कार्य भूमिका: लेखक

    परिचय (Bio):
    डॉ. वसुंधरा एक अनुभवी ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन हैं जिन्हें दंत सर्जरी, ट्रॉमा मैनेजमेंट और क्रेनियोफेशियल प्रक्रियाओं का अनुभव है। उन्होंने कई जटिल दंत सर्जरी जैसे डेंटल इम्प्लांट, जबड़े की फ्रैक्चर सर्जरी, सिस्ट सर्जरी और अन्य उन्नत दंत प्रक्रियाओं पर काम किया है। वे ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी से संबंधित क्लिनिकल रिसर्च और वैज्ञानिक प्रकाशनों में भी सक्रिय रूप से शामिल हैं।

    विशेष कौशल:
    ओरल सर्जरी, डेंटल इम्प्लांट, मैक्सिलोफेशियल ट्रॉमा उपचार, सर्जिकल प्रक्रियाएँ, क्लिनिकल रिसर्च।

  • डॉ. रुचिका राज, MDS (ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी), BDS

    ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन | मेडिकल कंटेंट विश्लेषक

    कार्य भूमिका: समीक्षक

    परिचय (Bio):
    डॉ. रुचिका राज एक अनुभवी ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन हैं जिन्हें दंत सर्जरी, इम्प्लांटोलॉजी और चिकित्सा अनुसंधान लेखन का अनुभव है। उन्हें क्लिनिकल प्रैक्टिस के साथ-साथ हेल्थकेयर संगठनों के लिए मेडिकल कंटेंट विश्लेषण का भी अनुभव है। उनका कार्य जटिल चिकित्सा और वैज्ञानिक शोध को सरल और प्रमाण आधारित स्वास्थ्य जानकारी के रूप में प्रस्तुत करना है।

    विशेष कौशल:
    ओरल सर्जरी, डेंटल इम्प्लांटोलॉजी, मेडिकल रिसर्च विश्लेषण, वैज्ञानिक लेखन, हेल्थकेयर कंटेंट डेवलपमेंट।

     

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