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 विटामिन की गोलियाँ ज़्यादा ले रहे हैं? यह फ़ायदे की जगह नुकसान कर सकती हैं 

विटामिन ओवरडोज़ Vitamin D, Vitamin A, Vitamin B6, Niacin और Vitamin E की ज़्यादा मात्रा लेने से हो सकता है। जानें इसके लक्षण, खतरे और सुरक्षित सप्लीमेंट लेने का सही तरीका।

“विटामिन तो अच्छी चीज़ है — ज़्यादा लो, और ज़्यादा फायदा होगा।” यह सोच बहुत आम है। लेकिन डॉक्टर और शोधकर्ता एक अलग कहानी बता रहे हैं। 

सच यह है कि कुछ विटामिन ज़रूरत से ज़्यादा लेने पर शरीर में जमा होने लगती हैं — और धीरे-धीरे नुकसान करने लगती हैं, बिना किसी साफ़ चेतावनी के। 

भारत का अजीब विरोधाभास 

इतनी धूप वाले देश में भी अध्ययन बताते हैं कि 76%–90% भारतीयों में विटामिन डी की कमी है — घर के भीतर रहने की आदत, वायु प्रदूषण और सीधी धूप से बचने की वजह से। इसीलिए लोग बिना जाँच करवाए विटामिन डी की ऊँची खुराक लेने लगते हैं — और यही समस्या की जड़ बन जाती है। 

कौन सी विटामिन सबसे ज़्यादा गलत मात्रा में ली जाती हैं? 

  • विटामिन डी: ज़्यादा लेने से खून में कैल्शियम बढ़ सकता है — उल्टी, मचलाहट, गुर्दे की खराबी तक पहुँच सकता है 
  • विटामिन ए: शरीर में जमा होती है — लंबे समय तक ज़्यादा लेने पर सिरदर्द, लीवर को नुकसान, धुँधला दिखना 
  • विटामिन बी6: मूड और ऊर्जा के लिए मशहूर — लेकिन अधिक मात्रा में हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन कर सकती है 
  • विटामिन बी3 (नियासिन): कोलेस्ट्रॉल के लिए ली जाती है — ज़्यादा होने पर लीवर को नुकसान और पेट की तकलीफ 
  • विटामिन ई: त्वचा और दिल के लिए — लेकिन खून पतला करने की दवाएँ लेने वालों में खून बहने का खतरा बढ़ा सकती है 

चर्बी में घुलने वाली विटामिन — ख़ास सावधानी क्यों? 

विटामिन दो तरह की होती हैं। पानी में घुलने वाली विटामिन — जैसे विटामिन सी और बी — अधिक होने पर पेशाब से बाहर निकल जाती हैं। लेकिन चर्बी में घुलने वाली विटामिन — एडीके — शरीर में जमा होती रहती हैं। थोड़ी-थोड़ी अधिकता भी हफ्तों-महीनों में ज़हरीली हो सकती है। 

ध्यान रखें — पानी में घुलने वाली विटामिन भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। विटामिन बी6 और नियासिन ज़रूरत से ज़्यादा लेने पर नसों और लीवर को नुकसान पहुँचा सकती हैं। 

सही तरीका क्या है? 

सबसे पहले खून की जाँच करवाएँ — असली कमी होने पर ही सप्लीमेंट लें। बिना जाँच के सोशल मीडिया के ट्रेंड देखकर गोलियाँ लेना भ्रामक हो सकता है। 

भारत में अब बहुत से पैकेट बंद खाने — आटा, तेल, दूध, नमक — में पहले से विटामिन और खनिज मिले होते हैं। ऊपर से सप्लीमेंट लेने पर बिना जाने तय मात्रा से ज़्यादा हो सकती है। 

अगर विटामिन लेने के बाद मचलाहटभ्रमझनझनाहट या दिल की धड़कन में गड़बड़ी लगे — तुरंत डॉक्टर से मिलें। आपातकाल में 112 या एम्स नई दिल्ली की राष्ट्रीय ज़हर सूचना केंद्र की निःशुल्क सेवा 1800-116-117 पर कॉल करें। 

[India-FSSAI] FSSAI Fortified Food Programme. +F Logo — Food Safety and Standards (Fortification of Foods) Regulations, 2018.

[India-NPIC] National Poison Information Centre (NPIC), AIIMS New Delhi. Toll-Free: 1800-116-117 (24×7). 

इसकी पूरी जानकारी के लिए विस्तृत लेख ज़रूर पढ़ें। जब विटामिन नुकसान करने लगें: सबसे ज़्यादा गलत मात्रा में ली जाने वाली पोषक तत्व और सुरक्षित रहने का तरीका

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  • Let Us Be Healthy

    I’m AJ, and my interest in health was born out of frustration—watching loved ones suffer from careless medical errors and lack of proper care left a lasting impact.
    After facing my own challenges with eczema, blood pressure, stress, sleep apnea, and metabolism, I began studying health deeply. I discovered how small, science-backed steps, especially through a plant-based lifestyle, can bring big improvements.

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