“गोल-मटोल पालतू = हेल्दी पालतू” — यह प्यार भरी ग़लतफ़हमी आपके Dog या Cat को बीमार कर रही है
भारत के शहरों में वेटरनरी क्लीनिक पहुँचने वाले करीब 30% कुत्ते ज़रूरत से ज़्यादा वज़नी होते हैं — और अधिकांश मालिकों को यह पता ही नहीं होता। मोटे पालतू को “अच्छे से खिलाया हुआ” समझना एक आम भारतीय ग़लती है, जो असल में उनकी उम्र और ख़ुशी दोनों छीन रही है।
मोटापा सिर्फ़ वज़न नहीं, बीमारियों की चेन है
रिसर्च बताती है कि ओवरवेट कुत्ते औसतन 2 साल कम जीते हैं। पालतू मोटापे से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ:
डायबिटीज (ख़ासकर बिल्लियों में) — इंसुलिन रेज़िस्टेंस से
जोड़ों का दर्द (Osteoarthritis) — लैब्राडोर जैसी नस्लों में बहुत आम
दिल और साँस की तकलीफ़ — सीढ़ी चढ़ने पर हाँफना इसकी शुरुआत है
कैंसर का बढ़ा हुआ ख़तरा और सर्जरी में 25–40% ज़्यादा ख़र्च
घर पर खुद जाँचें — 30 सेकंड का टेस्ट
अपने कुत्ते की पसलियों पर हाथ फेरें — बिना दबाव डाले पसलियाँ महसूस होनी चाहिए। ऊपर से देखने पर कमर हल्की पतली दिखे। अगर पेट गोल और लटकता हुआ है — तो यह चेतावनी है। सटीक जाँच के लिए वेटरनरी डॉक्टर से Body Condition Score (BCS) ज़रूर करवाएँ।
रोज़ कम से कम 30 मिनट वॉक — सुबह जल्दी या शाम को (गर्मी से बचाएँ)
महीने में एक बार वज़न ज़रूर नापेंब्रूनो (पुणे का 6 साल का लैब्राडोर) 42 किलो हो गया था। 10 महीने के सही खान-पान और वॉक से 7 किलो घटाया — और उसका पुराना चंचलपन वापस आ गया।
इस लेख में शामिल सभी संदर्भ लिंक 30 अप्रैल 2026 तक सत्यापित और सुलभ पाए गए थे।
परिचय (Bio): डॉ. निक्शिता कटंगुरी एक लाइसेंस प्राप्त पशु चिकित्सक हैं और उन्हें पालतू पशुओं की चिकित्सा, विदेशी पक्षियों की देखभाल तथा पशु कल्याण कार्यक्रमों में चार से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने पशु चिकित्सालयों और पशु कल्याण संगठनों के साथ काम करते हुए जानवरों के उपचार, रोकथाम संबंधी देखभाल और पोषण मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनका कार्य वैज्ञानिक आधार पर पशु चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और पशु पालकों को जिम्मेदार देखभाल के बारे में शिक्षित करना है।
विशेष कौशल: पशु चिकित्सा निदान, पशु पोषण योजना, पक्षी चिकित्सा, पालतू पशुओं की निवारक स्वास्थ्य देखभाल, पशु कल्याण कार्यक्रम।
भूमिका: पशु स्वास्थ्य सलाहकार एवं पेट केयर योगदानकर्ता
बायो: डॉ. निहारिका मून पशु शल्य चिकित्सा और रेडियोलॉजी में विशेषज्ञता रखने वाली एक स्नातकोत्तर पशु चिकित्सक हैं, जिनका विशेष शोध कुत्तों में पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा और स्किन फ्लैप तकनीकों पर आधारित है। इन्हें छोटे पशुओं की सॉफ्ट टिशू सर्जरी, एनेस्थीसिया और आपातकालीन चिकित्सा में मजबूत अनुभव है। इन्होंने पशु चिकित्सालयों, एनजीओ और वन्यजीव पुनर्वास केंद्रों में कार्य किया है, जहाँ इन्होंने घरेलू और विदेशी/वन्य पशुओं के मामलों को संभाला है। इनका कार्य उन्नत शल्य तकनीकों, साक्ष्य-आधारित उपचार और पशु कल्याण को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
विशेष कौशल: छोटे पशुओं की सर्जरी, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन प्रबंधन, आपातकालीन चिकित्सा, क्लिनिकल निदान, रेडियोग्राफी विश्लेषण, एंडोस्कोपी, एफएनएसी, विदेशी एवं वन्य पशु देखभाल, शल्य चिकित्सा प्रबंधन।
भूमिका: पशु शल्य सलाहकार एवं पशु देखभाल लेखक
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