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बुज़ुर्गों का संतुलन क्यों बिगड़ता है — और इसे रोका जा सकता है 

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घर में दादा-दादी या माँ-बाप को अचानक लड़खड़ाते देखा है? शायद आपने सोचा हो — “बस उम्र हो गई।” लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा गहरी है। 

भारत में 60 साल से ऊपर के हर 3 में से 1 बुज़ुर्ग हर साल गिरते हैं। और एक बार गिरने के बाद अक्सर एक डर पैदा हो जाता है — चलने का, बाहर निकलने का — जो धीरे-धीरे उनकी ज़िंदगी को और कमज़ोर बना देता है। 

तो असली वजहें क्या हैं? 

सिर्फ कमज़ोरी नहीं — वजहें कई हैं और हर एक ज़रूरी है: 

  • कान की सुनाई कम होना — JAMA के शोध के मुताबिक सिर्फ 10 डेसिबल कम सुनाई देने से गिरने का खतरा 1.4 गुना बढ़ जाता है। 
  • सेरिबेलम (मस्तिष्क का हिस्सा) कमज़ोर होना — उम्र के साथ इसकी ज़रूरी कोशिकाएँ (Purkinje cells) 40% तक कम हो सकती हैं। 
  • मांसपेशियों का घटना (Sarcopenia) — 60 की उम्र के बाद मांसपेशियाँ तेज़ी से कमज़ोर होती हैं। 
  • से ज़्यादा दवाएँ एक साथ लेना (Polypharmacy) — BP, एलर्जी, या नींद की दवाएँ संतुलन बिगाड़ सकती हैं। 
  • पेट का बैक्टीरिया (Gut Microbiome) — 2025 की नई रिसर्च बताती है कि आँत की सेहत सीधे मांसपेशियों और दिमाग दोनों को प्रभावित करती है। 
  • नींद की कमी और Vitamin D की कमी — भारत में 70–90% बुज़ुर्गों में Vitamin D कम पाया जाता है। 

क्या आप जानते हैं? BPPV नाम का एक कान का विकार है जिसमें सिर हिलाने पर चक्कर आता है — और इसे सिर्फ कुछ आसान exercises से ठीक किया जा सकता है। 

ये सब वजहें मिलकर एक “Fall-Fear-Frailty Cycle” बनाती हैं — जहाँ गिरने का डर, फिर चलना कम करना, फिर और कमज़ोरी। 

लेकिन अच्छी खबर यह है — इनमें से ज़्यादातर वजहें पहचानी और रोकी जा सकती हैं। 

सभी संदर्भ लिंक 1 जून 2026 को वैध और सुलभ होंगे।

पूरी जानकारी, व्यावहारिक सलाह, और एक्सपर्ट-गाइडेड exercise tips के लिए पूरा लेख ज़रूर पढ़ें — बुज़ुर्गों का संतुलन क्यों बिगड़ता है: 7 छुपे हुए कारण (और इसे कैसे ठीक करें)

Authors

  • डॉ. सान्या अंसारी, MBBS, MS (ENT), MRCS (UK)

    ईएनटी सर्जन एवं क्लिनिकल रिसर्च योगदानकर्ता

    कार्य भूमिका:लेखक

    परिचय (Bio):
    डॉ. सान्या अंसारी एक लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक हैं जो ईएनटी (कान, नाक और गला) तथा हेड एंड नेक सर्जरी में विशेषज्ञता रखती हैं। वे भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों में चिकित्सा अभ्यास के लिए पंजीकृत हैं। उन्हें ईएनटी रोगों के निदान, सर्जिकल उपचार, आपातकालीन वायुमार्ग देखभाल और रोगी-केंद्रित उपचार योजना का अनुभव है। वे अकादमिक शिक्षण और क्लिनिकल रिसर्च में भी सक्रिय रूप से योगदान देती हैं।

    विशेष कौशल:
    ईएनटी सर्जरी, क्लिनिकल निदान, सर्जिकल प्रक्रियाएँ, प्रमाण आधारित उपचार योजना, मेडिकल रिसर्च।

    भूमिका:
    क्लिनिकल हेल्थ विशेषज्ञ एवं मेडिकल कंटेंट रिव्यूअर

    लिंक्डइन: https://www.linkedin.com

  • दीक्षा कुलश्रेष्ठ, एम.एससी., पीएच.डी. (मॉलिक्यूलर मेडिसिन)

    मॉलिक्यूलर मेडिसिन रिसर्चर

    भूमिका: समीक्षक

    बायो:
    दीक्षा कुलश्रेष्ठ एक मॉलिक्यूलर मेडिसिन रिसर्चर हैं, जिन्हें आयरन मेटाबॉलिज्म, एडिपोजेनेसिस और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स में विशेषज्ञता है। इनके पास बायोमेडिकल रिसर्च, अकादमिक टीचिंग और एजुकेशनल कंटेंट क्रिएशन का व्यापक अनुभव है। इनका काम हाइपरग्लाइसीमिया, मोटापा और इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स में आयरन रेगुलेशन की भूमिका को समझने पर केंद्रित है। साथ ही, ये जटिल वैज्ञानिक कॉन्सेप्ट्स को छात्रों और हेल्थकेयर ऑडियंस के लिए सरल, स्ट्रक्चर्ड और एग्जाम-ओरिएंटेड कंटेंट में बदलने में भी विशेषज्ञ हैं।

    स्पेशल स्किल्स:
    मॉलिक्यूलर बायोलॉजी रिसर्च, आयरन मेटाबॉलिज्म एनालिसिस, एडिपोजेनेसिस स्टडीज, इम्यूनोलॉजी और कैंसर रिसर्च, साइंटिफिक राइटिंग, अकादमिक टीचिंग, नीट कंटेंट डेवलपमेंट, क्वेश्चन बैंक क्रिएशन, और हेल्थकेयर कंटेंट डेवलपमेंट।

    लिंक्डइन:
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