अच्छी सेहत, हमारे अपने हाथों में है।

ख़ामोश ख़तरा: आपके पालतू कुत्ते पर मंडराता टिक फीवर — जो दिखता नहीं, पर जान ले सकता है 

आप सोचते हैं — मेरा कुत्ता सिर्फ पक्की सड़क पर चलता है, ऊँची मंज़िल पर रहता है, तो टिक से क्या डर? यही सोच सबसे ख़तरनाक है। भारत के गर्म और नम मौसम में टिक फीवर का खतरा सिर्फ बरसात में नहीं — बल्कि लगभग पूरे साल बना रहता है। 

अपार्टमेंट में भी सुरक्षित नहीं 

ब्राउन डॉग टिक शहरों के लिए पूरी तरह ढल चुका है। यह आपके जूतों से, पड़ोसी के कुत्ते से, या लिफ्ट में चिपककर घर तक पहुँच सकता है और दरवाज़ों की दरारों, दीवारों के किनारे तथा कुत्ते के बिस्तर में महीनों छुपा रह सकता है। 2026 की शुरुआती रिपोर्ट बताती हैं कि मानसून से पहले ही, यानी मई-जून की गर्मी में, टिक फीवर के मामले बढ़ने लगते हैं। 

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तीन “ख़ामोश चोर” जो भीतर से तोड़ देते हैं 

टिक फीवर दरअसल तीन गंभीर बीमारियों का समूह है: 

  • Ehrlichia — सफ़ेद रक्त कणिकाओं और प्लेटलेट्स पर हमला करता है। कुत्ते के पेट पर लाल-बैंगनी धब्बे या नाक से खून आना चेतावनी के संकेत हैं 
  • Babesia — लाल रक्त कणिकाओं को तोड़ता है, जिससे खून की कमी हो जाती है। मसूड़े पीले पड़ जाएँ या पेशाब का रंग चाय जैसा गहरा हो जाए — तो देर मत करें 
  • Anaplasma — जोड़ों में सूजन और बुखार लाता है। कुत्ता सुबह एक पैर से लंगड़ाए और शाम को दूसरे से — यह इसकी पहचान है 

⚠️ कल तक बिल्कुल ठीक थाआज उठ ही नहीं पा रहा” — यही इन बीमारियों की सबसे आम शुरुआत होती है। 

इलाज से कहीं सस्ता है बचाव 

गंभीर टिक फीवर में अस्पताल में भर्ती, बार-बार खून की जाँच और रक्त आधान मिलाकर खर्च ₹25,000 से ₹50,000 या उससे भी अधिक हो सकता है। वहीं, पशु चिकित्सक की सलाह पर नियमित रोकथाम की दवा पर महीने में मात्र ₹600–1,500 का खर्च आता है। एक हफ्ते के अस्पताल के बिल में जितना पैसा जाता है, उसमें साल से ज़्यादा का बचाव हो सकता था। 

आज से शुरू करें — 5 आदतें जो कुत्ते की जान बचा सकती हैं 

  1. हर सैर के बाद 30 सेकंड — कान की तहों, पंजों की उंगलियों के बीच और पूँछ के नीचे हाथ से जाँचें 
  1. फोन में “टिक डे” रिमाइंडर लगाएँ — दवा की खुराक कभी न भूलें 
  1. टिक दिखे तो दबाएँ नहीं — बारीक चिमटी से त्वचा के पास से सीधा ऊपर खींचें, झटका न दें 
  1. हफ्ते में एक बार मसूड़ों का रंग (गुलाबी होने चाहिए), भूख और पेशाब का रंग जाँचें 
  1. अपने पशु चिकित्सक से उम्र, नस्ल और जीवनशैली के हिसाब से व्यक्तिगत बचाव योजना बनवाएँ 

📖 टिक फीवर की पूरी जानकारी, हर सवाल का जवाब और विस्तृत बचाव के उपाय पढ़ने के लिए पूरा लेख यहाँ पढ़ें: 

Authors

  • निहारिका मून

    पशु चिकित्सक एवं पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञ

    जॉब रोल : लेखक

    बायो:
    डॉ. निहारिका मून पशु शल्य चिकित्सा और रेडियोलॉजी में विशेषज्ञता रखने वाली एक स्नातकोत्तर पशु चिकित्सक हैं, जिनका विशेष शोध कुत्तों में पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा और स्किन फ्लैप तकनीकों पर आधारित है। इन्हें छोटे पशुओं की सॉफ्ट टिशू सर्जरी, एनेस्थीसिया और आपातकालीन चिकित्सा में मजबूत अनुभव है। इन्होंने पशु चिकित्सालयों, एनजीओ और वन्यजीव पुनर्वास केंद्रों में कार्य किया है, जहाँ इन्होंने घरेलू और विदेशी/वन्य पशुओं के मामलों को संभाला है। इनका कार्य उन्नत शल्य तकनीकों, साक्ष्य-आधारित उपचार और पशु कल्याण को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।

    विशेष कौशल:
    छोटे पशुओं की सर्जरी, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन प्रबंधन, आपातकालीन चिकित्सा, क्लिनिकल निदान, रेडियोग्राफी विश्लेषण, एंडोस्कोपी, एफएनएसी, विदेशी एवं वन्य पशु देखभाल, शल्य चिकित्सा प्रबंधन।

    भूमिका:
    पशु शल्य सलाहकार एवं पशु देखभाल लेखक

    लिंक्डइन:
    https://www.linkedin.com/

  • डॉ. निक्शिता कटंगुरी, BVSc & AH

    पशु चिकित्सक एवं पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञ

    कार्य भूमिका: समीक्षक

    परिचय (Bio):
    डॉ. निक्शिता कटंगुरी एक लाइसेंस प्राप्त पशु चिकित्सक हैं और उन्हें पालतू पशुओं की चिकित्सा, विदेशी पक्षियों की देखभाल तथा पशु कल्याण कार्यक्रमों में चार से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने पशु चिकित्सालयों और पशु कल्याण संगठनों के साथ काम करते हुए जानवरों के उपचार, रोकथाम संबंधी देखभाल और पोषण मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनका कार्य वैज्ञानिक आधार पर पशु चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और पशु पालकों को जिम्मेदार देखभाल के बारे में शिक्षित करना है।

    विशेष कौशल:
    पशु चिकित्सा निदान, पशु पोषण योजना, पक्षी चिकित्सा, पालतू पशुओं की निवारक स्वास्थ्य देखभाल, पशु कल्याण कार्यक्रम।

    भूमिका:
    पशु स्वास्थ्य सलाहकार एवं पेट केयर योगदानकर्ता

    लिंक्डइन: https://www.linkedin.com/

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